यूपी विधानमंडल का आगामी सत्र 3 अगस्त से

कैबिनेट निर्णय

वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण कार्य होंगे संपादित

 संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप विधानसभा और विधान परिषद के दोनों सदनों का होगा सत्र

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों का वर्ष 2026 का तृतीय सत्र 3 अगस्त (सोमवार) से आहूत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। आगामी सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक तथा अन्य महत्वपूर्ण विधायी कार्य संपादित किए जाएंगे। राज्य विधानमंडल का द्वितीय सत्र 30 अप्रैल को आहूत किया गया था। उसी दिन विधानसभा एवं विधान परिषद की बैठक समाप्त होने के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी तथा 7 मई 2026 से सत्रावसान कर दिया गया था। संविधान के अनुच्छेद-174 तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य-संचालन नियमावली के अनुसार विधानमंडल के दो सत्रों के बीच छह माह से अधिक का अंतर नहीं हो सकता। इसी संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप आगामी सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने पत्रकारों को बताया कि आगामी सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदानों की मांगें विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत की जाएंगी। इसके अलावा विगत सत्रावसान के बाद शासन के महत्वपूर्ण निर्णयों के क्रियान्वयन के लिए प्रख्यापित अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक भी सदन में प्रस्तुत कर पारित कराए जाएंगे। साथ ही अन्य आवश्यक विधायी एवं शासकीय कार्य भी संपादित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के अनुसार सत्र की निर्धारित तिथि की सूचना सामान्यत: सदस्यों को सात दिन पूर्व उपलब्ध कराई जाती है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार उत्तर प्रदेश विधानमंडल का तृतीय सत्र 3 अगस्त से प्रारंभ होगा। सत्र के दौरान अनुपूरक अनुदानों की मांगें, अध्यादेशों के प्रतिस्थानी विधेयक तथा अन्य आवश्यक विधायी कार्य संपादित किए जाएंगे।

नई इले्ट्रिरक बसों की खरीद को मंजूरी, रोडवेज में शामिल होंगी 250 ई-बसें
-425.50 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी जाएंगी ई-बसें, 50 व 41 सीटर की होगी क्षमता

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के बस बेड़े को बढ़ाने के लिए नई इले्ट्रिरक बसों की खरीद से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। इस पर कुल 425.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस निर्णय के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 400 करोड़ रुपये के प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त 25.50 करोड़ रुपये का खर्च यूपीएसआरटीसी वहन करेगा। इसी के साथ 250 नई इले्ट्रिरक बसों की खरीद का रास्ता साफ हो गया है।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट फैसले के मुताबिक रोडवेज बेड़े में 100 इले्ट्रिरक बसें (12 मीटर, 3.2 टाइप-टू, 50 सीटर) व 150 इले्ट्रिरक बसें (12 मीटर, 2.2 टाइप-थ्री, 41 सीटर) शामिल की जाएंगी। इन बसों के संचालन से प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और यात्री सुविधाओं के अनुरूप बनाया जाएगा। नई इले्ट्रिरक बसों की खरीद पर कुल 425.50 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है। इसमें 400 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष 25.50 करोड़ रुपये की व्यवस्था उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम अपने संसाधनों से करेगा। योगी सरकार ने बसों की खरीद में उत्तर प्रदेश के मैन्युफैक्चरर्स को प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। 1 नवंबर 2026 से सीएक्यूएम के निर्देशों के मुताबिक दिल्ली में केवल सीएनजी, इले्ट्रिरक और बीएस-6 श्रेणी के वाहनों को प्रवेश की अनुमति होगी। ऐसे में नई इले्ट्रिरक बसों की खरीद से उत्तर प्रदेश रोडवेज इन मानकों का समयबद्ध अनुपालन करेगा और एनसीआर क्षेत्र में बस संचालन निर्बाध रहेगा। योगी सरकार का ये फैसला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में लागू होने वाले पर्यावरणीय मानकों को देखते हुए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योगी सरकार इन इले्ट्रिरक बसों के जरिए प्रदेश के प्रमुख धार्मिक, पर्यटन व शहरी क्षेत्रों में यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित, आधुनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इससे डीजल आधारित बसों पर निर्भरता कम होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी व पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। नई बसों के संचालन से परिवहन निगम के बेड़े का विस्तार होगा, जिससे चालकों, परिचालकों व तकनीकी रख-रखाव से जुड़े कुशल-अकुशल कर्मियों के लिए नए रोजगार अवसर सृजित होंगे।

वाराणसी में बनेगा 500 बेड का अत्याधुनिक कामकाजी महिला छात्रावास
-6,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को होगी निशुल्क हस्तांतरित

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री श्रमजीवी महिला छात्रावास योजना के तहत वाराणसी में 500 क्षमता वाले उच्च गुणवत्तापूर्ण महिला छात्रावास के निर्माण के लिए 6,000 वर्गमीटर सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह भूमि हरिजन इंड्ट्रिरयल गवर्नमेंट, उत्तर प्रदेश सरकार के नाम दर्ज है जिसे अब महिला कल्याण विभाग के पक्ष में स्थानांतरित किया जाएगा। इस छात्रावास का निर्माण शत-प्रतिशत राज्य सरकार के वित्त पोषण से किया जाएगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि वाराणसी में 6000 वर्ग मीटर भूमि पर 500 क्षमता का एक छात्रावास बनाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने मंजूरी दी है। बजट में 7 छात्रावास बनाने का प्रावधान था, जिसमें से झांसी, आगरा, मेरठ और गोरखपुर के लिए पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। आज वाराणसी के लिए भी प्रस्ताव आज पास किया गया है। प्रदेश में निजी, सरकारी और औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही महिला कार्यबल की जरूरतों को देखते हुए महिला कल्याण विभाग कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती छात्रावासों का निर्माण करा रहा है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सस्ती दरों पर सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। राज्य सरकार के अधीन कार्यरत महिला कल्याण विभाग इस योजना का संचालन ‘नॉन-कॉमर्शियल, नो प्रॉफिट-नो लॉस’ सिद्धांत पर करेगा। इसी सामाजिक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए वाराणसी में छात्रावास निर्माण के लिए सरकारी भूमि महिला कल्याण विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित की जा रही है।

248.30 लाख रुपये से तैयार होगा 112 छात्राओं की क्षमता वाला छात्रावास

लखनऊ। यूपी कैबिनेट बैठक में छात्राओं की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने वाराणसी स्थित वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट फोर्ट में छात्राओं के लिए 112 सीटों वाले नए छात्रावास भवन के निर्माण को मंजूरी दे दी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि यह केंद्रीय विश्वविद्यालय काशी हिंदू विश्वविद्यालय का एक संघटक महाविद्यालय है। यह पिछले 112 वर्षों से अध्ययन के क्षेत्र में सेवा कर रहा है और ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ चल रहा है। अब तक एक छात्रावास था। जिसमें 220 छात्राओं के लिए सुविधा थी। उन्होंने बताया कि एक 248.30 लाख रुपये की लागत से त्वरित आर्थिक विकास योजना के अंतर्गत एक महिला छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। यह छात्रावास 112 छात्राओं के लिए होगा।

मेधावी छात्राओं को मिलेगी ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी’, एसओपी मंजूर
-स्नातक 2025-26 की टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मिलेगा लाभ, यूपी की मूल निवासी होना है अनिवार्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में महिला सशक्तीकरण और बेटियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ के क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देशों को मंजूरी दे दी गई। यह योजना छात्राओं की उच्च शिक्षा तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर को कम करना, उच्च शिक्षा में उनके अवधारण (रिटेंशन) को बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनकी आवागमन सुविधा और गतिशीलता सुनिश्चित करना तथा सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। इसके साथ ही छात्राओं में आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की भावना विकसित करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में उत्तर प्रदेश की मूल निवासी उन छात्राओं को लाभ मिलेगा, जिन्होंने प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। पात्र छात्राओं का चयन मेरिट के आधार पर स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं की टॉप 5 प्रतिशत सूची से किया जाएगा। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार योजना में पेट्रोल चालित स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने यह निर्णय प्रदेश के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंप और सर्विस सेंटर की बेहतर उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए लिया है। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। स्कूटी के पैकेज में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, आईएसआई मार्का हेलमेट, 4 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी शामिल होंगी, ताकि छात्राओं को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। प्रदेश सरकार का कहना है कि इस योजना से उच्च शिक्षा में बेटियों की भागीदारी बढ़ेगी, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी। साथ ही यह योजना महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ’ स्थापित करने की मंजूरी
-पांच वर्षों के लिए मिलेगा अधिकतम दो करोड़ रुपये का अनुदान, भारतीय ज्ञान परंपरा पर शोध को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मंगलवार को प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ’ स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। साथ ही योजना के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों को भी स्वीकृति दी गई। इस निर्णय का उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्धिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को उच्च शिक्षा से जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रवर्तकों एवं ज्ञान-विज्ञान के महान चिंतकों के विचारों के अध्ययन, अनुसंधान और प्रसार को बढ़ावा देना है। योजना के अन्तर्गत 50 वर्ष या उससे अधिक पुराने तथा 5,000 से अधिक छात्र संख्या वाले राज्य विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा के महान प्रवर्तकों के नाम पर शोधपीठ स्थापित की जाएंगी। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्ययक में 5 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इन शोधपीठों के माध्यम से महान भारतीय आचार्यों, दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और चिंतकों के योगदान का अनुसंधान, अभिलेखीकरण तथा व्यापक प्रसार किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों और शोधार्थियों में तार्किकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा वैश्विक उपयोगिता के प्रति जागरूकता विकसित की जाएगी।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया है। इसी के अनुरूप शोधपीठों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा, पर्यावरणीय ज्ञान, कृषि परंपराओं, सांस्कृतिक अध्ययन तथा भारतीय ज्ञान की अन्य विधाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण और अनुसंधान किया जाएगा, ताकि इनका लाभ समाज तक पहुंच सके। उन्होंने बताया कि शोधपीठ किसी विश्वविद्यालय अथवा महाविद्यालय के विभाग, केंद्र अथवा संकाय में सामान्यत: पांच वर्षों के लिए स्थापित की जाएगी तथा इस अवधि के बाद समीक्षा के आधार पर इसके विस्तार पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक शोधपीठ की स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा पांच वर्षों के लिए अधिकतम दो करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। यह राशि सावधि बचत खाते में जमा की जाएगी तथा उससे प्राप्त ब्याज का उपयोग शोधपीठ के संचालन और उसकी निरंतरता बनाए रखने में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर), दान तथा अन्य स्रोतों से भी अनुदान प्राप्त किया जा सकेगा, जिसे उसी सावधि बचत खाते में जमा किया जाएगा। इस निर्णय से प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी और भारतीय ज्ञान-विज्ञान को वैश्विक अकादमिक विमर्श से जोड़ने में सहायता मिलेगी।

यूपी आउटसोर्स सेवा निगम को मिलेगा 20 करोड़ का ब्याजमुक्त ऋण
-5 वर्षों तक निगम पर ऋण अदायगी का नहीं रहेगा दायित्व, उसके बाद 2 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष करना होगा भुगतान

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के संचालन को गति देने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के आय-व्यय में प्रावधानित 20 करोड़ रुपये की धनराशि निगम को ब्याज मुक्त ऋण के रूप में उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इस निर्णय से नवगठित निगम के संचालन को मजबूती मिलेगी व प्रदेश में आउटसोर्स सेवाओं के प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाया जा सकेगा। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन कंपनी अधिनियम-2013 की धारा-8 के अंतर्गत एक गैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में किया गया है। निगम का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संचालित करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में निगम अपने संचालन के शुरुआती चरण में है। ऐसे में इसके प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, आउटसोर्सिंग एजेंसियों से लिए जाने वाले सेन्टेज चार्ज सहित अन्य व्यवस्थाओं को विकसित करने, कार्य संचालन को सुचारु रूप से शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता की आवश्यकता थी। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने 20 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि निगम प्रारंभिक वर्षों में अपनी आय के माध्यम से ऋण चुकाने की स्थिति में नहीं होगा। प्रारंभिक आंकलन के आधार पर पहले पांच वर्षों तक निगम पर ऋण अदायगी का दायित्व नहीं रहेगा। इसके बाद निगम अपनी आय से 2 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की दर से अगले दस वर्षों में इस ऋण का भुगतान करेगा।

25.78 करोड़ रुपये से और प्रभावी बनेगी अग्निशमन तथा आपात सेवा
-44 वाटर टेंडर और 5 फोम टेंडरों से बढ़ेगी आपात सेवा की क्षमता, आग लगने की घटनाओं पर त्वरित नियंत्रण पाना है उद्देश्य

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लखनऊ स्थित लोकभवन में हुई कैबिनेट बैठक में अग्निशमन एवं आपात सेवा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी कैबिनेट ने विभाग के लिए कुल 44 वाटर टेंडरों और 5 फोम टेंडरों के निर्माण और खरीद के लिए 25 करोड़ 78 लाख 85 हजार रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी। इस निर्णय के तहत नई मांग के सापेक्ष 5 वाटर टेंडर (2500 लीटर क्षमता) का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा निष्प्रयोज्य के सापेक्ष 39 वाटर टेंडर (2500 लीटर क्षमता) तथा 5 फोम टेंडर (5000+500 लीटर क्षमता) का निर्माण एवं क्रय किया जाएगा। इन सभी वाहनों में चेसिस, हाई प्रेशर पंप, फैब्रिकेशन और आवश्यक एसेसरीज शामिल होंगी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि अग्निशमन एवं आपात सेवा एक अत्यंत महत्वपूर्ण आपातकालीन सेवा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण, शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाना है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश के तंग मोहल्लों, भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों, कस्बों, औद्योगिक इकाइयों, पेट्रोलियम एवं गैस प्रतिष्ठानों, रासायनिक इकाइयों, एयरपोर्ट, हेलीपैड तथा पेंट और अन्य ज्वलनशील तरल पदार्थों के गोदामों में आग बुझाने के लिए आधुनिक फायर टेंडरों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि आग को बुझाने के लिए जहां अग्निशमन की गाड़ियां नहीं पहुंच पाती है, वहां के लिए यह छोटे-छोटे वाटर टेंडरों की व्यवस्था की जा रही है।

चार नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी
-आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 12,264 करोड़ रुपये से अधिक की दो लिंक परियोजनाओं को हरी झंडी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को नई मजबूती देने वाले चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई। कैबिनेट ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एवं गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली दो लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए संशोधित एवं अंतिम रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) को मंजूरी देने के साथ ही विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक के अलाइनमेंट को भी स्वीकृति प्रदान कर दी। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक 50.98 किलोमीटर लंबे छह लेन (भविष्य में आठ लेन विस्तारणीय) ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण ईपीसी मॉडल पर किया जाएगा। इस परियोजना की अनुमानित लागत 4,775.84 करोड़ रुपये है। वहीं आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 90.84 किलोमीटर लंबे छह लेन (आठ लेन विस्तारणीय) ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण 7,488.74 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इस तरह कुल मिलाकर कैबिनेट ने 12,264 करोड़ रुपये से अधिक की दो लिंक परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद दोनों परियोजनाओं के लिए विकासकर्ता के चयन की निविदा प्रक्रिया शुरू होगी। चयनित एजेंसी को लगभग 36 माह में निर्माण कार्य पूरा करना होगा, जबकि इसके बाद पांच वर्षों तक अनुरक्षण (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी उसी की होगी।
योगी सरकार का उद्देश्य आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक मजबूत एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार करना है। इससे लंबी दूरी की यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होगी। साथ ही समय और ईंधन की बचत के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। कैबिनेट ने विंध्य एक्सप्रेसवे के छह लेन (भविष्य में आठ लेन विस्तारणीय) ग्रीनफील्ड मार्ग को भी मंजूरी दी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 26,315 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना के तहत प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र को बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा। इसके अलावा विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक (विकल्प-1) को भी कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। लगभग 9,039 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को आपस में जोड़ेगी।

Chief Reporter Pioneer Hindi

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