आखिरी दिन बारिश में सैलानियों ने किए बाघों के रोमांचक दीदार
पायनियर संवाददाता। पीलीभीत

उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध पीलीभीत टाइगर रिजर्व के चूका टूरिज्म इको-पर्यटन सत्र 2025-26 का मंगलवार को सफल समापन हो गया। सत्र के अंतिम दिन मानसून की पहली बारिश के बीच जंगल का मनमोहक नजारा देखने को मिला। बारिश में बाघों सहित कई वन्यजीवों की सक्रियता बढ़ने से पर्यटकों को शानदार वन्यजीव दर्शन का अवसर मिला, जिससे समापन दिवस यादगार बन गया। पूरे पर्यटन सत्र के दौरान 56,783 पर्यटकों ने टाइगर रिजर्व का भ्रमण किया, जिनमें 216 विदेशी पर्यटक भी शामिल रहे। इस बार टाइगर रिजर्व प्रशासन ने सामाजिक सरोकार निभाते हुए ‘दिव्य दर्शन’ कार्यक्रम के तहत दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को निशुल्क सफारी कराई।
इसके अलावा विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को भी जंगल की जैव विविधता से रूबरू कराया गया। चूका पर्यटन स्थल पर तैनात 110 टूरिस्ट गाइडों ने पर्यटकों को बाघ, हिरनों की विभिन्न प्रजातियों, पक्षियों और जंगल के प्राकृतिक परिवेश के साथ शारदा नदी एवं उसकी सहायक नदियों की जानकारी दी। इस पर्यटन सत्र में पर्यटकों की सुविधा के लिए चार थारू हट, एक बंबू हट, एक ट्री हट, बराही वन विश्राम भवन से संचालित तीन नए सफारी जोन, सिग्नेचर गेट के पास कैंटीन तथा सप्त सरोवर क्षेत्र में वुडन हट, ग्रीन हट, टेंट हट और अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
हालांकि इस बार विदेशी पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष के 452 से घटकर 216 रह गई, लेकिन राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस सत्र में टाइगर रिजर्व को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब दो लाख रुपये अधिक है। मानसून के आगमन के साथ अब टाइगर रिजर्व को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है। आगामी नवंबर में नया पर्यटन सत्र शुरू होगा, जब एक बार फिर घने जंगलों के बीच बाघों की दहाड़ और प्राकृतिक सौंदर्य सैलानियों का स्वागत करेगा।










