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आरक्षण था, है और रहेगा—मगर अंतिम आदमी तक कब पहुँचेगा? न्यायप्रिय समीक्षा का समय आ गया है

आरक्षण भारत के सामाजिक न्याय की यात्रा का महज एक संवैधानिक प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों की सामाजिक विषमता से उपजी आवश्यकता है। जिन समुदायों को…