मुख्य सामग्री पर जाएं
हिंदी संस्करण
पायनियर स्वतंत्र · निष्पक्ष · निर्भीक
उत्तर प्रदेश

दामाद पर सास को जिंदा जलाने का आरोप, राख से मिलीं हड्डियां और तीन कंगन, हत्या का मुकदमा दर्ज

राख में दबा राज, डीएनए खोलेगा मौत का सच अदनान खान। पीलीभीत रिश्तों की डोर कब अपराध के शक में बदल जाए, अमरिया थाना क्षेत्र के गांव जिठनियां का मामला इसकी सनसनीखेज तस्वीर पेश कर रहा है। 65 वर्षीय मोहन देई के…

साझा करें WhatsAppFacebookX
दामाद पर सास को जिंदा जलाने का आरोप, राख से मिलीं हड्डियां और तीन कंगन, हत्या का मुकदमा दर्ज
65 वर्षीय मोहन देई

राख में दबा राज, डीएनए खोलेगा मौत का सच

अदनान खान। पीलीभीत

रिश्तों की डोर कब अपराध के शक में बदल जाए, अमरिया थाना क्षेत्र के गांव जिठनियां का मामला इसकी सनसनीखेज तस्वीर पेश कर रहा है। 65 वर्षीय मोहन देई के कथित तौर पर लापता होने के बाद भूसे के ढेर की राख से मिलीं हड्डियां और तीन कंगनों ने पूरे मामले को रहस्य में बदल दिया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि दामाद महेंद्र ने मोहन देई की हत्या कर शव को भूसे के ढेर में जलाकर साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। पुलिस ने बेटे की तहरीर पर हत्या समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामले की सबसे अहम कड़ी अब डीएनए जांच बन गई है। पुलिस ने राख से बरामद अस्थि अवशेषों को सुरक्षित कर सील किया और वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी है। कंगनों को भी कब्जे में लिया गया है। अब डीएनए रिपोर्ट ही यह स्पष्ट करेगी कि राख से मिले अवशेष वास्तव में मोहन देई के हैं या फिर इस पूरे मामले के पीछे कोई दूसरा सच छिपा है। गांव निवासी सुरेश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसके पिता नत्थू लाल की करीब छह वर्ष पहले मौत हो चुकी है।

परिवार में तीन बेटे थे। छोटे बेटे की करीब डेढ़ वर्ष पहले पानी में डूबने से मौत हो गई थी। सुरेश अलग रहता है, जबकि उसका भाई माखन लाल मां मोहन देई के साथ रहता था। बताया गया कि मजदूरी के सिलसिले में माखन अक्सर गजरौला थाना क्षेत्र के गांव स्वार पिपरिया स्थित अपने जीजा महेंद्र के यहां जाता था। इसी बीच 31 जुलाई को गांव निवासी नन्ने लाल के भूसे के ढेर में आग लग गई। आग लगने के मामले में एक अगस्त को नन्ने लाल ने महेंद्र के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस उसकी तलाश में दबिश देती रही, लेकिन वह हाथ नहीं आया।

इधर, माखन घर पहुंचा तो उसकी मां मोहन देई वहां नहीं मिलीं। काफी तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं लगा। इसी दौरान परिजनों का शक उस भूसे के ढेर की राख पर गया, जहां आग लगी थी। राख कुरेदने पर हड्डियों के अवशेष मिले। साथ ही तीन कंगन भी बरामद हुए। परिजनों ने कंगनों के आधार पर बरामद अवशेषों को मोहन देई के होने का दावा किया। इसके बाद मामला आग लगने से कहीं आगे बढ़ गया। बेटे ने अपने जीजा महेंद्र पर मां की हत्या कर शव भूसे के ढेर में जलाकर साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अब डीएनए जांच पर टिकी निगाहें

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि राख से बरामद हड्डियां आखिर किसकी हैं। आरोप गंभीर हैं, लेकिन वैज्ञानिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इसी वजह से पुलिस ने अस्थि अवशेषों को डीएनए परीक्षण के लिए भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मोहन देई की मौत और बरामद अवशेषों के बीच संबंध स्पष्ट हो सकेगा। सीओ सदर आईपीएस नताशा गोयल ने बताया कि मौके से मिले हड्डियों समेत अन्य अवशेषों को डीएनए परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद अवशेष मोहन देई के हैं या नहीं। मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है।