शहीद राम लखन यादव को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
वैभव दीक्षित। सीतापुर
देश की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में तैनात सीतापुर के वीर जवान राम लखन यादव शहीद हो गए। रविवार को जैसे ही उनकी शहादत की सूचना पैतृक गांव रनियापुर पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शाम करीब पांच बजे जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और वातावरण ‘‘भारत माता की जय‘‘ तथा ‘‘शहीद राम लखन यादव अमर रहें‘‘ के नारों से गूंज उठा। मिश्रिख तहसील की ग्राम सभा रनियापुर निवासी जगदीश प्रसाद यादव के पुत्र राम लखन यादव वर्ष 2015 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। वह अपनी कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति के लिए जाने जाते थे। वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में थी।
जानकारी के अनुसार सेना परिसर में भोजन तैयार किए जाने के दौरान अचानक सिलेंडर विस्फोट हो गया। हादसे में कई सैनिक घायल हुए, जबकि राम लखन यादव गंभीर रूप से झुलस गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। रविवार को पार्थिव शरीर गांव पहुंचने पर सेना के जवानों ने पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी। जवानों ने कंधा देकर पार्थिव शरीर को अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचाया। सलामी के बाद पिता जगदीश प्रसाद यादव ने मुखाग्नि दी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और हजारों ग्रामीणों ने श्रद्धासुमन अर्पित कर वीर सपूत को नमन किया। पूरे गांव में शोक का माहौल रहा और लोगों ने उनके बलिदान को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया।
तीन साल पहले बसी थी दुनिया, अब यादों का सहारा
सीतापुर। शहीद राम लखन यादव की शादी करीब तीन वर्ष पहले हुई थी। उनके परिवार में पत्नी, माता-पिता और एक मासूम बेटी है। शहादत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। सबसे मार्मिक दृश्य उनकी मासूम बेटी का रहा, जिसे अभी यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। परिवार में बड़े भाई शैलेंद्र यादव, हरिनाम यादव और छोटी बहन गीता यादव हैं। गांव में हर किसी की जुबान पर यही बात थी कि देश ने एक बहादुर सैनिक खोया है, जबकि परिवार ने अपना सबसे बड़ा सहारा।










