श्रीराम के वनवास का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

हैदरगढ़ बाराबंकी। मनोकामना हनुमान मंदिर के समीप आयोजित श्रीराम कथा में अंतरराष्ट्रीय कथावाचक देवी ऋचा मिश्रा ने भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों, माता कैकेयी के दो वरदान और श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि किस प्रकार मंथरा के बहकावे में आकर माता कैकेयी का मन बदल गया और अयोध्या में उत्सव का माहौल शोक में बदल गया। कथावाचक ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ चल रही थीं। नगरवासी अपने प्रिय राजकुमार को राजसिंहासन पर आसीन होते देखने के लिए उत्साहित थे।
महल से लेकर नगर की गलियों तक उत्सव का माहौल था। इसी बीच दासी मंथरा ने माता कैकेयी के मन में भरत के भविष्य और राजसिंहासन को लेकर आशंकाएं पैदा कर दीं। उसके बहकावे में आकर कैकेयी कोपभवन में चली गईं। महाराज दशरथ जब उन्हें मनाने पहुंचे, तो कैकेयी ने पूर्व में दिए गए दो वरदानों की याद दिलाई। पहले वरदान में उन्होंने भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और दूसरे में भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। कैकेयी की यह मांग सुनकर महाराज दशरथ शोकाकुल हो उठे। श्रीराम के प्रति अपार स्नेह के बावजूद वे वचनबद्ध होने के कारण विवश थे। देवी ऋचा मिश्रा ने बताया कि भगवान श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए वनवास स्वीकार कर लिया।
उनके लिए राजसुख से बढ़कर माता-पिता की आज्ञा, सत्य और धर्म का पालन था। उन्होंने कहा कि श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम के आयोजक दीनदयाल बाजपेयी ने उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर चेयरमैन आलोक तिवारी, कृष्ण कुमार द्विवेदी, रोहित दीक्षित, शाश्वत मिश्रा, दुर्गेश सिंह, दीपक दीक्षित, पम्मी मिश्रा, मन्नी चौहान, विनय पांडेय और भीम प्रताप सिंह सहित हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे।



