सरकारी जमीन पर अधिवक्ताओं के चेंबर, कब्जा हटाने के आदेश से मची खलबली

पुराना तहसील भवन ध्वस्त होने के बाद खाली हुई जमीन पर चल रहा था निर्माण, डीएम कार्यालय ने एसडीएम को एक सप्ताह में कार्रवाई की रिपोर्ट देने के दिए निर्देश
पायनियर संवाददाता। पूरनपुर,पीलीभीत
पुरानी तहसील भवन के ध्वस्तीकरण के बाद खाली हुई सरकारी जमीन पर अधिवक्ताओं द्वारा चेंबर बनाए जाने का मामला अब तूल पकड़ गया है। करीब 15 दिनों से चल रहे निर्माण के दौरान प्रशासन की ओर से प्रभावी रोक-टोक न होने के बाद अब जिलाधिकारी कार्यालय से जारी आदेश के बाद तहसील प्रशासन हरकत में आया है। आदेश में राजस्व विभाग की भूमि से तत्काल कब्जा हटवाकर एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय से 24 सितंबर को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पुराने निष्प्रयोज्य तहसील भवन के ध्वस्तीकरण के बाद खाली हुई भूमि राजस्व विभाग के स्वामित्व एवं प्रबंधनाधीन है। पत्र में संबंधित गाटा संख्याओं का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इसी भूमि के हिस्से में पुराना तहसील भवन स्थित था। भवन ध्वस्त होने के बाद कुछ अधिवक्ताओं द्वारा उक्त भूमि पर कब्जा कर चेंबर बनाए जाने की जानकारी सामने आई।
जिलाधिकारी कार्यालय के आदेश में उपजिलाधिकारी पूरनपुर को राजस्व विभाग की भूमि से तत्काल कब्जा हटवाने तथा एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही भविष्य में सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा न होने देने के लिए भी कहा गया है।
इधर, सोमवार रात तहसीलदार आशीष कुमार गुप्ता ने निर्माणाधीन एक अधिवक्ता का चेंबर ध्वस्त करा दिया। इसकी जानकारी होने पर मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे दो दर्जन से अधिक अधिवक्ता तहसीलदार कार्यालय पहुंच गए और कार्रवाई का विरोध जताया। अधिवक्ताओं के विरोध के बीच तहसीलदार ने जिलाधिकारी के आदेश की प्रति दिखाते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर बनाए गए सभी चेंबर हटाए जाने हैं।
अधिवक्ताओं का कहना था कि जब करीब 15 दिनों से चेंबरों का निर्माण चल रहा था, तब प्रशासन ने उसी समय निर्माण क्यों नहीं रुकवाया। अब एक चेंबर ध्वस्त किए जाने के बाद अन्य चेंबरों पर भी कार्रवाई की बात सामने आने से अधिवक्ताओं में नाराजगी है।
मामले में प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिवक्ताओं का तर्क है कि यदि भूमि सरकारी थी और वहां निर्माण किया जा रहा था तो शुरुआत में ही प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए थी। अब जिलाधिकारी के आदेश के बाद सभी चेंबर हटाए जाने की बात से तहसील परिसर में खलबली मची हुई है।
विरोध जताने वालों में पूर्व अध्यक्ष अमिताभ मिश्रा, रजनीश सक्सेना, त्रिभुवन शर्मा, लालाराम, नईम, शाहिद, यूनुस, महामंत्री सुशील सक्सेना, उपाध्यक्ष संजय पांडे, संजय विश्वास, मुकेश, रितुराज शर्मा, त्रिभुवन पांडे समेत अन्य अधिवक्ता शामिल रहे।
तहसीलदार आशीष कुमार गुप्ता ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश के क्रम में सरकारी भूमि पर बनाए गए अधिवक्ताओं के सभी चेंबर हटाए जाएंगे।



