14 वर्षीय किशोरी को मिली नई जिंदगी
पायनियर संवाददाता
पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत के इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) के चिकित्सकों ने टाइप-3सी डायबिटीज के एक दुर्लभ और जटिल मामले का सफल उपचार कर 14 वर्षीय किशोरी को स्वस्थ कर घर भेज दिया। चिकित्सकों ने इस उपलब्धि के साथ लोगों से अग्न्याशय संबंधी बीमारियों और मधुमेह की समय पर जांच कराने की अपील भी की है।
चिकित्सकों के अनुसार किशोरी को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। जांच में उसका ब्लड शुगर 563 एमजी,डीएल और एचबीए 1 सी 21.3 प्रतिशत पाया गया, जो लंबे समय से अनियंत्रित मधुमेह का संकेत था। सीटी स्कैन में क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस की पुष्टि हुई, जिससे अग्न्याशय की इंसुलिन और पाचन एंजाइम बनाने वाली कोशिकाएं प्रभावित हो चुकी थी। इसी वजह से उसे टाइप-3bसी डायबिटीज हो गई थी।
किशोरी को आईसीयू में भर्ती कर चिकित्सकों ने सबसे पहले इंट्रावेनस इंसुलिन इन्फ्यूजन के जरिए ब्लड शुगर नियंत्रित किया। हालत में सुधार होने पर उसे नियमित इंसुलिन थेरेपी पर शिफ्ट किया गया। साथ ही पाचन क्षमता बेहतर करने के लिए पैनक्रियाटिन एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी भी शुरू की गई। इलाज के बाद किशोरी पूरी तरह स्थिर होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। मामले का एक अहम पहलू यह भी रहा कि किशोरी की मां भी मधुमेह से पीड़ित हैं और बीमारी पर नियंत्रण न होने के कारण उनका घुटने के नीचे का पैर काटना पड़ा था। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से ऐसी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।
आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम ने बताया कि टाइप-3 सी डायबिटीज को अक्सर टाइप-1 या टाइप-2 डायबिटीज समझ लिया जाता है, जबकि इसका उपचार अलग होता है। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने आईसीयू टीम की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान जटिल और दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए आधुनिक सुविधाएं और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। मीडिया प्रभारी डॉ. अरुण सिंह ने कहा कि जिन मरीजों को लंबे समय से पेट दर्द, पैंक्रियास की बीमारी या बार-बार पैंक्रियाटाइटिस की समस्या हो और साथ में मधुमेह के लक्षण भी हों, उन्हें टाइप-3 सी डायबिटीज की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर सही पहचान और उपचार से गंभीर बीमारियों से बचाव तभी संभव है।










