व्यवसायी और अभिनेता राज कुंद्रा ने हाल ही में यूके (ब्रिटेन) की अदालत से जुड़े एक मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विस्तृत बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूके कोर्ट का हालिया आदेश उनके Emerging Media में किए गए निवेश से जुड़े लंबे समय से चल रहे व्यावसायिक विवाद का हिस्सा है और इसे पूरे मामले से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए।
राज कुंद्रा ने कहा कि यूके अदालत का आदेश बिना पूर्ण सुनवाई और उनकी ओर से विस्तृत भागीदारी के पारित हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी कानूनी टीम फिलहाल भारत में चल रही मुख्य कानूनी कार्यवाहियों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जहां उनके अधिकारों और निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई जारी है।
‘शेयर लौटाए जाएं तो समझौता राशि देने को तैयार हूं’
अपने बयान में राज कुंद्रा ने कहा कि वह विवाद के समाधान के लिए पूरी तरह तैयार हैं और मांगी गई समझौता राशि का भुगतान करने को भी इच्छुक हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब उनके शेयर उनके कानूनी अधिकारों के अनुसार वापस किए जाएं।
उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से यही रुख रहा है कि वित्तीय दायित्वों और शेयरधारिता की बहाली, दोनों मुद्दों का समाधान एक साथ होना चाहिए। उनके अनुसार केवल वित्तीय पक्ष को अलग से देखने से विवाद की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
निवेश की वास्तविक कीमत से वंचित किए जाने का आरोप
राज कुंद्रा ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने निवेश की वास्तविक कीमत से वंचित किया गया। उनका दावा है कि Emerging Media के प्रमोटरों, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं, द्वारा कथित रूप से गलत आश्वासन और भ्रामक प्रस्तुतियां दी गईं।
उन्होंने कहा कि ये आरोप भारत में चल रहे व्यापक कानूनी विवाद का हिस्सा हैं और इन्हीं मुद्दों पर भारतीय अदालतों में सुनवाई हो रही है। कुंद्रा का कहना है कि उनके निवेश और शेयरों से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी है।
भारत में तीन कानूनी मामले लंबित
राज कुंद्रा ने बताया कि Emerging Media से जुड़े तीन अलग-अलग कानूनी मामले वर्तमान में भारत की अदालतों में लंबित हैं। इनमें कंपनी के संचालन, कथित उत्पीड़न (Oppression) और कुप्रबंधन (Mismanagement) जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम अदालत से उनके शेयर और संबंधित अधिकारों को सुरक्षित रखने तथा बहाल करने की मांग कर रही है। उन्हें भरोसा है कि भारतीय अदालतें सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेंगी।
‘यूके आदेश का भारतीय मामलों पर असर नहीं होना चाहिए’
राज कुंद्रा का मानना है कि यूके अदालत का आदेश भारत में चल रही मुख्य कानूनी कार्यवाहियों के मूल मुद्दों का निपटारा नहीं करता। इसलिए इसका भारतीय अदालतों में विचाराधीन मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनकी कानूनी टीम को विश्वास है कि भारतीय न्यायालय किसी अन्य देश में हुई प्रक्रियात्मक कार्रवाई के आधार पर उन्हें न्याय पाने या अपने दावों को आगे बढ़ाने के अवसर से वंचित नहीं होने देंगे।
भारतीय न्यायपालिका पर जताया भरोसा
अपने बयान के अंत में राज कुंद्रा ने कहा कि चूंकि मामला अभी अदालत में विचाराधीन है, इसलिए वह इस पर अधिक टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। उन्होंने भारतीय न्यायिक प्रणाली पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कि अंततः न्याय की जीत होगी।
उन्होंने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करते हैं और उम्मीद करते हैं कि सभी मुद्दों का निष्पक्ष तथा तथ्यों के आधार पर समाधान होगा।










