अदनान खान। पीलीभीत
बीसलपुर कोतवाली पुलिस ने पति की हत्या के सनसनीखेज मामले का खुलासा करते हुए मृतक की पत्नी और उसके कथित प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार अवैध संबंधों में बाधा बन रहे पति को रास्ते से हटाने के लिए दोनों ने सुनियोजित साजिश रची और उसे जहरीला पदार्थ मिलाकर चाय पिला दी, जिससे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक 18 जुलाई को मजदूरी कर बरेली से घर लौटे समाकान्त ने अपनी पत्नी रेनू मिश्रा को उसके कथित प्रेमी शिवम शुक्ला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था।
इसका विरोध करने पर दोनों ने समाकान्त की हत्या की योजना बनाई। आरोप है कि रेनू ने चाय में जहरीला पदार्थ मिलाकर पति को पिला दिया। चाय पीते ही उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन उसे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीसलपुर और बाद में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतक के भाई ब्रजगोपाल की तहरीर पर बीसलपुर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
विवेचना और साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को पुलिस ने कस्बे की स्मार्ट सिटी पुलिया के पास से आरोपी पत्नी रेनू मिश्रा निवासी मोहल्ला हबीबुल्ला खां जनूबी एकतानगर कॉलोनी कोतवाली बीसलपुर और उसके कथित प्रेमी शिवम शुक्ला पुत्र नागेश शुक्ला निवासी रौसर कोठी, जनपद शाहजहांपुर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक संजीव कुमार शुक्ला, कांस्टेबल रवि कुमार, कांस्टेबल परमजीत, महिला कांस्टेबल अल्का राणा महिला कांस्टेबल चंचल भाटी शामिल रहीं।
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मां के साथ जेल पहुंची एक साल की मासूम, अपराध की सबसे बेबस सजा
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बीसलपुर में पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार रेनू मिश्रा के साथ उसकी करीब एक साल की मासूम बेटी भी जिला जेल पहुंच गई। पिता की मौत और मां की गिरफ्तारी के बीच इस मासूम का बचपन सलाखों के साये में पहुंच गया। कानून के अनुसार छह वर्ष तक के बच्चों को मां के साथ जेल में रहने की अनुमति है, फिलहाल इस हत्याकांड ने जहां रिश्तों को शर्मसार किया है, वहीं सबसे दर्दनाक तस्वीर उस मासूम की है, जिसे न अपराध का अर्थ मालूम है और न ही अपने बदलते जीवन का एहसास। जिस उम्र में उसे परिवार के स्नेह और सुरक्षित माहौल की जरूरत थी, उसी उम्र में उसे जेल का वातावरण देखना पड़ेगा। पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है, जबकि मां न्यायिक हिरासत में है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़ों के अपराध की सबसे बड़ी कीमत अक्सर मासूम बच्चों को ही चुकानी पड़ती है।










