उच्चतम न्यायालय वीडियोकॉन समूह की दो कंपनियों की अलग दिवाला कार्यवाही पर सुनवाई को तैयार

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई, जिसमें समूह की दो कंपनियों वीआईएल और वीओवीएल के लिए अलग-अलग दिवाला कार्यवाही को बरकरार रखने के एनसीएलएटी के आदेश को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने धूत की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को तय की। धूत ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के 14 मई के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के पहले के आदेश को निरस्त कर दिया था। एनसीएलटी ने दोनों कंपनियों की दिवाला कार्यवाहियों को एक साथ चलाने का निर्देश दिया था।

यह आदेश वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड (वीआईएल) और वीडियोकॉन आॅयल वेंचर्स लिमिटेड (वीओआईएल) से जुड़ा था। एनसीएलएटी ने कहा था कि इन दोनों कंपनियों के ऋणदाताओं की मंशा अलग-अलग समाधान प्रक्रिया चलाने की है, क्योंकि उनके कारोबार की प्रकृति अलग है। वीआईएल जहां उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में है वहीं वीओवीएल तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी है। ऐसे में एक ही इकाई द्वारा दोनों का प्रभावी पुनर्गठन व्यावहारिक नहीं है। बीपीसीएल की अनुषंगी भारत पेट्रो रिसोर्सेज लिमिटेड (बीपीआरएल) ने ‘पहले खरीद के अधिकार’ का इस्तेमाल करते हुए वीओवीएल का अधिग्रहण किया और जून, 2024 में इसे एनसीएलटी की मंजूरी भी मिल गई। वहीं, वीआईएल की दिवाला प्रक्रिया अभी लंबित है।

एनसीएलएटी ने यह भी कहा था कि ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) के व्यावसायिक निर्णय में न्यायाधिकरण को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। साथ ही, दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) का उद्देश्य परिसंपत्तियों के समाधान के साथ कंपनी को चालू स्थिति में बनाए रखना भी है। यह मामला 2012 से जुड़ा है, जब वीडियोकॉन समूह की दोनों कंपनियों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह से संयुक्त रूप से कर्ज लिया था। बाद में 2016-17 में वीआईएल को सह-ऋणी से हटाकर कॉरपोरेट गारंटर बनाया गया था, ताकि विदेशी तेल-गैस परिसंपत्तियों को घरेलू कारोबार की समस्याओं से अलग रखा जा सके।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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