फर्जी काम दिखाकर पांच लाख रुपये निकालने का आरोप, डीएम से शिकायत

विक्रमपुर ग्राम पंचायत में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल, पहले की जांच में प्रधान के दोषी पाए जाने का दावा
पायनियर संवाददाता। पीलीभीत
ग्राम पंचायत विक्रमपुर में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और फर्जी कार्य दर्शाकर करीब पांच लाख रुपये का ग़बन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में ग्राम पंचायत के विकास कार्यों और सरकारी धन के खर्च को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
ग्राम विक्रमपुर निवासी शौहरत मदार समेत अन्य ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि ग्राम पंचायत में फर्जी काम दर्शाकर सरकारी धन हड़पने के संबंध में 17 अप्रैल 2025 को शपथ पत्र के साथ शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद कमेटी गठित कर मामले की जांच कराई गई। ग्रामीणों का दावा है कि जांच में तत्कालीन ग्राम प्रधान को दोषी पाया गया था। इसके बाद एक अप्रैल 2026 को प्रधान के अधिकार सीज कर दिए गए।
शिकायत के अनुसार प्रधान के अधिकार सीज होने के बाद एडीओ नजमूल हसन को ग्राम पंचायत विक्रमपुर का प्रशासक बनाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए पंचायत में कुछ ऐसे कार्य दर्शाए गए, जो मौके पर कराए ही नहीं गए। इन कथित फर्जी कार्यों के नाम पर करीब पांच लाख रुपये का सरकारी धन निकाल लिया गया।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस धनराशि के खर्च और कार्यों को लेकर जब जानकारी हासिल करने का प्रयास किया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासक से काम के संबंध में पूछे जाने पर कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि उन्हें जानकारी नहीं है कि काम किसके द्वारा कराया गया। इससे ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब काम कराने वाले का ही पता नहीं, तो सरकारी धन किस आधार पर और किसके माध्यम से निकाल दिया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में सरकारी धन का दुरुपयोग कर बंदरबांट की गई है। उनका कहना है कि यदि विकास कार्य वास्तव में कराए गए हैं तो उनका मौके पर सत्यापन कराया जाए और संबंधित अभिलेखों, भुगतान पत्रावलियों तथा कार्यों की जांच की जाए। वहीं यदि कार्य कागजों तक ही सीमित पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों से सरकारी धन की वसूली कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, पंचायत के अभिलेखों और कराए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।
शिकायत पर शौहरत मदार, चिंतामणि उर्फ रामपाल, मो. अय्यूब और मुन्ना लाल समेत विक्रमपुर के ग्रामीण शामिल हैं। अब देखना यह है कि जांच में कागजों पर दौड़ रहे विकास कार्य जमीन पर भी मिलते हैं या सरकारी धन के कथित खेल का पर्दाफाश होता है।
- विकास कार्यों के नाम पर ठेकेदार पर धांधली का आरोप
शिकायतकर्ता शोहरत मदार ने ठेकेदार रिजवान पर विक्रमपुर क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर जमकर धांधली किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि गांव में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों की गुणवत्ता और मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सरकारी धन का सही तरीके से उपयोग किए बिना ही कई कार्यों को कागजों में पूरा दिखाने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और मौके पर कराए गए कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।




