शाह के इस्तीफे की मांग पर संसद ठप, हंगामे के बीच ही लोकसभा में जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित

राज्यसभा में राम मंदिर चढ़ावा मुद्दा भी गूंजा सिर्फ 20 मिनट चली कार्यवाही

नई दिल्ली। संसद में शुक्रवार को विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए हंगामा किया जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे के बीच ही लोकसभा ने जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन के प्रावधान वाले विधेयक को बिना चर्चा के पारित कर दिया। निचले सदन की बैठक शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। वे आसन के निकट पहुंचकर गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी सदस्यों से अपने स्थान पर जाने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, कई बार आग्रह किया है कि प्रश्नकाल महत्वपूर्ण समय होता है, यह सदस्यों का समय है। आप प्रश्नकाल के अंदर नियोजित तरीके से गतिरोध पैदा मत करिये। आप सदन को चलने दें। उन्होंने कहा, आज प्रियंका (गांधी) जी का भी प्रश्न होना है और वह प्रश्न पूछने के लिए खड़ी हैं लेकिन आप लोग सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। बिरला ने कहा, कुछ माननीय सदस्य जिस तरह भेष बदल-बदलकर आते हैं उन्हें मेरी चेतावनी है। कई सदस्यों ने मुझसे मिलकर और मुझे लिखकर कहा है कि संसद भवन और संसद परिसर की पवित्रता और मयार्दा बनी रहनी चाहिए। आप संसद की पवित्रता और गरिमा को समाप्त कर रहे हैं। सदन में निर्दलीय सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को आज साधुओं की तरह भगवा वस्त्र पहने हुए देखा गया। शोर-शराबा नहीं थमने पर उन्होंने कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। बैठक 12 बजे फिर शुरू हुई तो हंगामा जारी रहा। हंगामे के बीच ही जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को बिना चर्चा के पारित कर दिया गया। इसके बाद बैठक दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। संसद के मानसून सत्र की शुरूआत 20 जुलाई को हुई थी और तब से सदन में विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के कारण अब तक प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सके हैं। उधर राज्यसभा में भी समान नजारा दिखा। नीट प्रश्नपत्र लीक होने के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री के बयान की मांग और अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर विपक्षी सदस्यों ने हंगामे किया। इस वजह से राज्यसभा की बैठक शुरू होने के करीब बीस मिनट बाद ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल केवल 15 मिनट ही चल पाया और केवल चार सदस्य ही लोक महत्व से जुड़े अपने मुद्दे उठा सके। पूर्वाह्न 11 बजे कार्यवाही शुरू होने पर सभापति सी पी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे के बीच विपक्षी सदस्यों ने मांग की कि नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए। सभापति से अनुमति मिलने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और उच्च सदन में विपक्ष के नेता खरगे ने कहा कि उन्होंने नोटिस दिया है। राधाकृष्णन ने पूछा कि नोटिस किस नियम के तहत दिया गया। इस पर खरगे ने कहा कि उन्होंने नियम 267 के तहत नियत कामकाज स्थगित कर एक विशेष मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नोटिस दिया है। सभापति ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत कोई भी नोटिस स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह पहले ही नियम 267 के बारे में व्यवस्था दे चुके हैं। खरगे का नियम 267 के तहत दिया गया नोटिस अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितताओं और धन के कथित दुरुपयोग से संबंधित था। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने कथित पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गृह मंत्री अमित शाह के सदन में आने की मांग की। विपक्ष ने इस मुद्दे पर गृह मंत्री के इस्तीफे की भी मांग की है। विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन पर सड़क-छाप (ओछी) राजनीति करने और सदन की गरिमा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। चौहान ने कहा, वे सड़क-छाप राजनीति कर रहे हैं और सदन की गरिमा से खिलवाड़ कर रहे हैं। लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है… वे केवल हंगामा करना चाहते हैं, चर्चा नहीं। उन्होंने हंगामा कर रहे सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही चलने देने की अपील की लेकिन अपनी बात का असर होते न देख उन्होंने 11 बज कर बीस मिनट पर कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।

राज्यसभा में विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। कार्यवाही शुरू होने के महज बीस मिनट के भीतर ही सदन दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया। शून्यकाल सिर्फ 15 मिनट चल सका, जिसमें केवल चार सदस्य ही अपने मुद्दे उठा पाए। हंगामे के बीच नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 267 के तहत राम मंदिर भूमि अधिग्रहण में कथित अनियमितता और धन के दुरुपयोग पर चर्चा की मांग करते हुए नोटिस दिया, लेकिन सभापति सी पी राधाकृष्णन ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में बुलाने की मांग की। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पलटवार करते हुए विपक्ष पर “सड़क-छाप राजनीति” और सदन की गरिमा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया, और कहा कि विपक्ष लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहा है। हंगामा थमता न देख सभापति ने 11:20 बजे ही कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। उधर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदस्यों को भेष बदलकर सदन में आने पर चेतावनी दी।

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