संयोग से गोलकीपर बने मोहित हॉकी विश्व कप में करेंगे भारत की रक्षा

नयी दिल्ली। संयोग से गोलकीपर बने कर्नाटक के 24 वर्षीय मोहित एचएस का भारत के लिए हॉकी विश्व कप खेलने का सपना आखिरकार पूरा होने जा रहा है।वह 15 से 30 अगस्त तक नीदरलैंड और बेल्जियम की संयुक्त मेजबानी में होने वाले एफआईएच हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करेंगे। अनुभवी गोलकीपर सूरज करकेरा के साथ मोहित भारतीय टीम के दो गोलकीपरों में शामिल हैं। यह उपलब्धि उनके अब तक के प्रेरणादायक सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोहित का अनुभव करकेरा जितना नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में उन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। खासकर एफआईएच प्रो लीग के अंतिम चरण में उनके दमदार खेल ने चयनकर्ताओं का भरोसा और मजबूत किया।

दिलचस्प बात यह है कि मोहित का गोलकीपर बनने का सफर पूरी तरह संयोग से शुरू हुआ था। स्कूल की हॉकी टीम में गोलकीपर नहीं होने के कारण उनके कोच ने उनकी लंबाई को देखते हुए उन्हें इस जिम्मेदारी के लिए चुना। यह अप्रत्याशित मौका धीरे-धीरे उनके सफल करियर की नींव बन गया। इसके बाद उन्होंने जूनियर विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया और फिर सीनियर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाते हुए लगातार आगे बढ़ते गए।हॉकी इंडिया की ओर से जारी बयान में मोहित ने कहा, ”मेरी हमेशा से यही सोच रही है कि भारत के लिए बड़े टूर्नामेंट खेलूं। जूनियर विश्व कप में हम पदक नहीं जीत सके थे और चौथे स्थान पर रहे थे। तभी से मेरा सपना था कि भारत के लिए कुछ बड़ा करूं।

मोहित ने भारतीय हॉकी के महान गोलकीपर पी.आर. श्रीजेश से मिली सीख का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”हमने श्रीजेश से बहुत कुछ सीखा है। लेकिन उनके जैसा प्रदर्शन करने का दबाव हम पर नहीं है। उन्होंने भारत के लिए शानदार योगदान दिया है। हम मैदान पर अपना शत-प्रतिशत देंगे और फिर परिणाम जो होगा, उसे स्वीकार करेंगे।भारतीय टीम हाल ही में समाप्त हुए एफआईएच प्रो लीग अभियान में नीदरलैंड और जर्मनी जैसी मजबूत टीमों को हराने के बाद नए आत्मविश्वास के साथ विश्व कप में उतर रही है।टीम की तैयारियों पर मोहित ने कहा, नीदरलैंड और जर्मनी को हराने के बाद हमारा आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। मुझे लगता है कि विश्व कप से पहले हमारी तैयारियां सही दिशा में हैं।

मोहित के लिए विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करना सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनका लक्ष्य मैदान पर हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देना और भारत को फिर से विश्व चैंपियन बनाने में योगदान देना है।उन्होंने कहा, मेरे लिए सबसे बड़ा पैमाना यही है कि जब भी मैं मैदान पर उतरूं, देश के लिए अपना सौ प्रतिशत दूं। मेरे सीनियर करियर में इससे बड़ा अवसर अब तक नहीं मिला है। मैं भारत को एक बार फिर विश्व चैंपियन बनाने की पूरी कोशिश करूंगा।गौरतलब है कि भारत ने एफआईएच हॉकी विश्व कप का अपना एकमात्र स्वर्ण पदक वर्ष 1975 में कुआलालंपुर में पाकिस्तान को हराकर जीता था।

Senior Sports Reporter Pioneer Hindi

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