एजेंसी। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोमवार को सुभाषित शेयर किया है। प्रधानमंत्री की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया, हम सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनें, कल्याणकारी विचारों को अपनाएं। स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित में समर्पित करें तथा सत्य, प्रामाणिक और जनहितकारी सूचनाओं का प्रसार कर राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त तथा समरस बनाएं।
पीएम ने इसके लिए एक संस्कृत श्लोक भी शेयर किया-
भद्रं कर्णेभि: शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्रा:॥
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायु:॥
इससे पहले प्रधानमंत्री की ओर से 7 अगस्त को सुभाषित शेयर किया गया था। तब पीएम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा था, किं चन्द्रमा: प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभि: कुमुदावबोधनम। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम॥
इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की इच्छा से अपनी किरणों द्वारा कमुदुनी को प्रकाशित नहीं करता, अपितु यह उसका स्वाभाविक गुण है। उसी प्रकार महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं, क्योंकि परोपकार उनके स्वभाव में होता है। इसके पहले 6 अगस्त को प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा था, विश्वस्वं मातरमोषधीनां ध्रुवां भूमिं पृथिवीं धर्मणा धृताम। शिवां स्योनामनु चरेम विश्वहा॥ इस श्लोक का हिंदी अर्थ है, जिसमें सभी प्रकार की श्रेष्ठ वनस्पतियां और औषधियां पैदा होती हैं, वह पृथ्वी माता विस्तृत और स्थिर हो। विद्या, शौर्य, सत्य, स्नेह आदि सद्गुणों से पालित-पोषित, कल्याणकारी और सुख-साधनों को देने वाली मातृभूमि की हम सदैव सेवा करें।