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वंदे मातरम रोका तो अब सीधे जेल

गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की सजा, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी 15 अगस्त को पहली बार लालकिले से गूंजेगा राष्ट्रगीत एजेंसी। नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम…

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वंदे मातरम रोका तो अब सीधे जेल
  • गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की सजा, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
  • 15 अगस्त को पहली बार लालकिले से गूंजेगा राष्ट्रगीत

एजेंसी। नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत वंदे मातरम को वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 कानून बन गया है। लोकसभा में 30 जुलाई को यह विधेयक पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी। इस कानून के तहत वंदे मातरम को राष्ट्रगान जन गण मन के समान दर्जा प्राप्त है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम गाया जाएगा। इससे पहले, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान जन गण मन के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे गायन में शामिल किसी सभा में व्यवधान डालना प्रतिबंधित था। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। वहीं, दूसरी और उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल की सजा का प्रावधान था। हालांकि, पुराने कानून में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को इसी तरह का कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। विधेयक में कहा गया था, वर्तमान में, राष्ट्रगीत के रूप में सम्मानित वंदे मातरम के गायन का अपमान रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या ऐसे गायन में संलग्न किसी भी सभा में बाधा उत्पन्न करने से प्रतिबंधित करने के लिए, उक्त अधिनियम की धारा तीन में संशोधन करके राष्ट्रगीत को भी इसके दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि ऐसे कृत्यों को दंडनीय बनाया जा सके। विधेयक में कहा गया कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 को कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, को राष्ट्रगान जन गण मन के समान सम्मान दिया जाएगा और इसका दर्जा भी राष्ट्रगान के बराबर होगा।

कब और कैसे गाया जाएगा वंदे मातरम, तय हुआ प्रोटोकॉल

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस साल की शुरूआत में 28 जनवरी को जारी आदेश में पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के लिए प्रोटोकॉल तय किया था। इसके तहत जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों एक साथ बजाए या गाए जाएं, तो सबसे पहले वंदे मातरम के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिनकी कुल अवधि तीन मिनट दस सेकंड है। राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों में इसका पालन अनिवार्य होगा। आदेश के मुताबिक जिस सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाया जाए, वहां मौजूद सभी लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा रहना होगा। साथ ही निर्देश दिया गया है कि देशभर के सभी स्कूलों में दिन की शुरूआत वंदे मातरम के सामूहिक गायन के साथ की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना का संचार हो सके।