गोसाईगंज में कीचड़ में सिमटी जिंदगी: काजी खेड़ा की बदहाल सड़कें बनीं ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत

बरसात में दलदल बन जाती हैं गलियां

बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों की आवाजाही तक प्रभावित; वर्षों से सड़क और नाली निर्माण की मांग अधर में

इरफ़ान अब्बासी। लखनऊ

गोसाईगंज विकासखंड का काजी खेड़ा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाली का जीवन जीने को मजबूर है। गांव की मुख्य सड़कें और गलियां बरसात शुरू होते ही कीचड़ और जलभराव की चपेट में आ जाती हैं। हालात ऐसे हैं कि सड़कें नहीं, बल्कि दलदल दिखाई देती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क और नाली निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की उदासीनता के चलते आज तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका गांव में प्रवेश करते ही विकास के दावों की हकीकत साफ नजर आती है। जगह-जगह जलभराव, टूटी सड़कें और घुटनों तक फैला कीचड़ ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। हर बारिश के साथ हालात और भयावह हो जाते हैं।

लोगों को घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है, जबकि स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों के लिए यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं रहता। ग्रामीण अमरेश कुमार बताते हैं कि गांव में वर्षों से पक्की सड़क और समुचित जल निकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। बारिश का पानी दिनों तक सड़कों पर जमा रहता है, जिससे पूरे गांव में कीचड़ फैल जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है, जिन्हें रोज स्कूल जाने के लिए इसी कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय निवासी शुभम वर्मा का कहना है कि जलभराव के कारण दोपहिया वाहन निकालना भी खतरे से खाली नहीं है। कई स्थानों पर सड़क और नाली का अंतर ही समाप्त हो गया है, जिससे आए दिन वाहन चालक गिरकर चोटिल हो जाते हैं। बारिश के बाद कई दिनों तक पानी भरा रहने से दुर्गंध फैलती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। गांव आने-जाने वाले लोगों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण आदित्य वर्मा बताते हैं कि ग्राम पंचायत, ब्लॉक प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से कई बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

उनका कहना है कि विकास कार्यों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन काजी खेड़ा जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि समय रहते सड़क और नालियों का निर्माण नहीं कराया गया तो बरसात के पूरे मौसम में हालात और गंभीर हो जाएंगे। शिवम वर्मा का कहना है कि गांव के लोगों को अब वादों की नहीं, बल्कि जमीन पर विकास कार्यों की जरूरत है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव का स्थलीय निरीक्षण कर तत्काल पक्की सड़क, नाली निर्माण और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है।

अधिकारियों का पक्ष

जब इस संबंध में गोसाईगंज विकासखंड अधिकारी राजेश बहादुर सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि ग्राम सचिव को मौके की स्थिति से अवगत करा दिया गया है। समस्या के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द कराई जाएगी ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासनों का नहीं, बल्कि ऐसी सड़कों का इंतजार है जिन पर उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकें और गांव की जिंदगी कीचड़ से निकलकर विकास की राह पर आगे बढ़ सके।

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