भारत-ब्रिटेन एफटीए महज व्यापार तक सीमित नहीं, द्विपक्षीय संबंधों के लिए अहम: विदेश सचिव

पेरिस। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा है कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) केवल व्यापार और प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के लोगों के लिए कई नए अवसर खोलेगा। मिस्री ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जी7 शिखर सम्मेलन के इतर फ्रांस के एवियॉन शहर में हुई द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार, प्रौद्योगिकी, क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा प्रमुख विषय रहे। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर के साथ बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक एवं व्यापार साझेदारी समझौते (सीईटीए) को 15 जुलाई से लागू करने की घोषणा की।

मिस्री ने कहा कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते पर पिछले वर्ष दोनों प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए थे और अब यह समझौता 15 जुलाई से प्रभावी होगा। यह एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार के साथ द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रगति है। उन्होंने बताया कि इस समझौते से मौजूदा 48 अरब पाउंड के वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है और इसका प्रभाव व्यापक भारत-ब्रिटेन संबंधों पर भी पड़ेगा। मिस्री ने कहा कि दोनों देशों के उद्योग जगत इस समझौते के लागू होने को लेकर काफी उत्साहित हैं और विस्तार योजनाओं की तैयारी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ब्रिटेन हमारे सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है और एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी सहयोगी भी है। यह समझौता केवल व्यापार और प्रौद्योगिकी से आगे बढ़कर दोनों देशों के बीच आवाजाही को भी बढ़ावा देगा। इस बीच, यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ व्यापार वार्ता में भी प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंतोनियो कोस्टा के साथ बैठक की। भारत-ईयू एफटीए वार्ता का समापन इस साल की शुरुआत में हो चुका है। मिस्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है और संबंधित टीमों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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