भारत में अपार्टमेंट, कार्यालय, अस्पताल, शॉपिंग मॉल और सार्वजनिक भवनों में प्रतिदिन करोड़ों लोग लिफ्ट का उपयोग करते हैं। ऐसे में लिफ्ट की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि लिफ्ट में यात्रा करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित पक्षों का कानूनी दायित्व है।
30 जुलाई 2026 को दिए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय में अदालत ने कहा कि लिफ्ट दुर्घटना होने पर पीड़ित या उसके परिवार को यह साबित करने की आवश्यकता नहीं होगी कि वास्तविक लापरवाही किसकी थी। वे किसी भी जिम्मेदार पक्ष से पूर्ण मुआवजे की मांग कर सकते हैं। बाद में संबंधित पक्ष आपस में अपनी जिम्मेदारी के अनुसार भुगतान का बंटवारा करेंगे।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
अदालत ने कहा कि जैसे ही कोई व्यक्ति लिफ्ट में प्रवेश करता है, वह अपनी सुरक्षा पूरी तरह लिफ्ट के निर्माता, रखरखाव एजेंसी और भवन प्रबंधन के भरोसे छोड़ देता है। इसलिए इन सभी पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सर्वोच्च दायित्व है।
सुप्रीम कोर्ट ने लिफ्ट की तुलना “कॉमन कैरियर (Common Carrier)” से करते हुए कहा कि जिस प्रकार यात्रियों को ले जाने वाली सेवाओं पर उच्च स्तर की सुरक्षा का दायित्व होता है, उसी प्रकार लिफ्ट संचालित करने वाले सभी पक्ष भी समान रूप से जवाबदेह हैं।
दुर्घटना होने पर कौन होगा जिम्मेदार?
अदालत के अनुसार लिफ्ट दुर्घटना की स्थिति में संयुक्त रूप से जिम्मेदार होंगे—
* लिफ्ट का निर्माता या स्थापना करने वाली कंपनी।
* लिफ्ट के रखरखाव (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसी।
* भवन का स्वामी, प्रबंधन, हाउसिंग सोसायटी, आरडब्ल्यूए (RWA) या भवन प्रबंधक।
पीड़ितों के लिए बड़ी राहत
फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब पीड़ित या मृतक के परिजनों को पहले यह साबित नहीं करना होगा कि दुर्घटना के लिए वास्तविक दोषी कौन था।
वे ऊपर बताए गए किसी भी जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध मुआवजे का दावा कर सकते हैं। इसके बाद संबंधित पक्ष आपस में जिम्मेदारी तय करेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इससे वर्षों तक चलने वाले विवाद और एक-दूसरे पर दोषारोपण की स्थिति में कमी आएगी तथा पीड़ितों को समय पर राहत मिल सकेगी।
किस मामले में आया फैसला?
यह निर्णय वर्ष 2003 में नई दिल्ली स्थित रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) मुख्यालय में हुई एक दुखद लिफ्ट दुर्घटना से जुड़ा है।
पूर्व राजनयिक विपिन हांडा एक खराब लिफ्ट में फंस गए थे। बचाव अभियान के दौरान लिफ्ट अचानक चल पड़ी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। वहीं लिफ्ट में मौजूद अन्य 11 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि संबंधित लिफ्ट में पहले से कई तकनीकी खराबियां थीं, जिनकी जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए और न ही लिफ्ट का संचालन समय रहते बंद किया गया।
अदालत ने मृतक के परिवार को ₹3 करोड़ से अधिक का मुआवजा तथा उस पर ब्याज** देने के आदेश को बरकरार रखा।
जिम्मेदारी का अनुपात
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जिम्मेदारी का विभाजन भी निर्धारित किया—
लिफ्ट कंपनी — 70%
रखरखाव/पर्यवेक्षण एजेंसी — 25%
भवन प्रबंधन/उपयोगकर्ता — 5%
हाउसिंग सोसायटी और भवन प्रबंधन के लिए क्या संदेश?
अदालत के इस फैसले के बाद हाउसिंग सोसायटी, आरडब्ल्यूए, अपार्टमेंट एसोसिएशन, मॉल, होटल, अस्पताल और अन्य संस्थानों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
उन्हें सुनिश्चित करना चाहिए कि—
* अधिकृत एजेंसी से नियमित प्रिवेंटिव मेंटेनेंस कराया जाए।
* लिफ्ट से जुड़ी हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो।
* निरीक्षण और रखरखाव का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।
* वार्षिक सुरक्षा निरीक्षण समय पर कराया जाए।
* किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में लिफ्ट का संचालन तुरंत रोक दिया जाए।
* आपातकालीन संचार प्रणाली हर समय कार्यशील रहे।
* सुरक्षा और बचाव कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए।लिफ्ट उपयोगकर्ताओं के लिए जरूरी सावधानियां
विशेषज्ञों के अनुसार उपयोगकर्ताओं को भी कुछ सावधानियां अपनानी चाहिए—
* निर्धारित क्षमता से अधिक भार न डालें।
* बीच में रुकने पर दरवाजा जबरन खोलने की कोशिश न करें।
* अलार्म या इमरजेंसी कॉल सिस्टम का उपयोग करें।
* प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम का इंतजार करें।
* असामान्य आवाज, झटके या लेवलिंग में गड़बड़ी दिखाई देने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
यह निर्णय केवल एक मुआवजा विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में करोड़ों लिफ्ट उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्थापित करता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और लिफ्ट से जुड़े सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में लिफ्ट सुरक्षा मानकों को और मजबूत करेगा तथा दुर्घटनाओं की स्थिति में पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।










