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हरियाणा के 69 शिक्षक एससीईआरटी गुरुग्राम में सीख रहे जर्मन भाषा

हरियाणा के 69 शिक्षक एससीईआरटी गुरुग्राम में सीख रहे जर्मन भाषा
एससीईआरटी गुरुग्राम में जर्मन भाषा की ट्रेनिंग लेते विभिन्न स्कूलों के टीचर।

शिक्षकों को प्रभावी तरीके से मजबूत बनाना उद्देश्य

गुरुग्राम। हरियाणा के सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए अब विदेशी भाषा सीखने और वैश्विक अवसरों तक पहुंच बनाने का नया रास्ता खुलने जा रहा है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), गुरुग्राम में हरियाणा के विभिन्न सरकारी स्कूलों के 69 शिक्षकों को जर्मन भाषा की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे आगे चलकर अपने स्कूलों में बच्चों को जर्मन सिखा सकें।


एससीईआरटी गुरुग्राम में सोमवार से जर्मन भाषा का चार दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण शुरू हुआ है, जो एक अक्टूबर तक चलेगा। इससे पहले इन सभी शिक्षकों को लगभग दो महीने तक ऑनलाइन माध्यम से जर्मन भाषा का प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब फेस-टू-फेस कक्षाओं में शिक्षकों को भाषा के साथ-साथ शिक्षण विधियों का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के पहले दिन शिक्षकों के अलग-अलग ग्रुप बनाए गए और विभिन्न इंटरएक्टिव गतिविधियों, खेलों और संवाद के माध्यम से जर्मन भाषा को बेहद रोचक अंदाज में सिखाया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि इसका उद्देश्य केवल भाषा का ज्ञान देना नहीं, बल्कि शिक्षकों को इस तरह तैयार करना है कि वे इसे विद्यार्थियों तक सरल, रोचक और प्रभावी तरीके से पहुंचा सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये 69 शिक्षक अपने-अपने सरकारी स्कूलों में जर्मन भाषा की कक्षाएं शुरू करेंगे। इससे सरकारी स्कूलों के बच्चों को स्कूल स्तर पर ही एक अंतरराष्ट्रीय विदेशी भाषा सीखने का अवसर मिलेगा। यह पहल नई शिक्षा नीति के उस विजन को भी मजबूती देती है, जिसमें भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं के ज्ञान को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। 

एससीईआरटी से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि जर्मन भाषा विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खोल सकती है। जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों में भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि सरकारी स्कूलों के बच्चे 9वीं-10वीं कक्षा से ही जर्मन सीखना शुरू करेंगे तो भविष्य में उनके लिए स्कॉलरशिप, एक्सचेंज प्रोग्राम और रोजगार के अवसर सुलभ होंगे। खास बात यह है कि इस पहल से ग्रामीण और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों तक भी वैश्विक अवसरों की पहुंच बढ़ेगी।


प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान डॉ. अजय लोहान ने कहा कि भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण का जरिया है। जर्मन जैसी विदेशी भाषा सीखने से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे। इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम में एससीईआरटी प्रभारी संतोष बांगड़, सुखदा मैम के मार्गदर्शन में जर्मन भाषा विशेषज्ञ मोहिता, कुसुम मैम और आरती मैम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रशिक्षकों ने बताया कि आने वाले समय में जर्मन भाषा को हरियाणा के अधिक सरकारी स्कूलों में वैकल्पिक विषय के रूप में शुरू करने की योजना है। शिक्षा विभाग की इस पहल की शिक्षकों ने भी सराहना की। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूल के बच्चे प्रतिभा में किसी से कम नहीं हैं, बस उन्हें सही मंच और अवसर चाहिए। जर्मन भाषा का प्रशिक्षण उनके सपनों को स्कूल की चारदीवारी से निकालकर देश-दुनिया तक ले जाने में मदद करेगा।

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