एम्स में वाहनों की पार्किंग पर शुल्क वसूली से लोगों में आक्रोश

रजनी गोयल। ऋषिकेश
ऋषिकेश एम्स में वाहनों की पार्किंग पर शुल्क वसूली शुरू होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। एम्स प्रशासन के इस निर्णय की जानकारी मिलते ही शहर के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में आक्रोश है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मरीजों के परिजनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र व राज्य सरकार जहां एक ओर एम्स में महज 10 रुपये की परामर्श पर्ची पर आम जनता को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर पार्किंग शुल्क के नाम पर मरीजों के तीमारदारों से वसूली कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि एम्स ऋषिकेश में पिछले लंबे समय से वाहनों की पार्किंग पूरी तरह नि:शुल्क थी। लेकिन हाल ही में लागू की गई नई व्यवस्था के तहत दोपहिया वाहनों से 20 रुपये और चौपहिया वाहनों से 50 रुपये पार्किंग शुल्क वसूल किया जा रहा है।
पार्किंग शुल्क लागू होने के कारण कई लोग शुल्क से बचने के लिए वाहनों को एम्स परिसर के बाहर सड़कों पर खड़ा कर रहे हैं। जिससे एम्स के बाहर नो पार्किंग और जाम की समस्या होने लगी है। व्यापार मंडल के महामंत्री प्रतीक कालिया समाजसेवी सुधीर राय और आशुतोष शर्मा ने एम्स प्रशासन से मुलाकात कर इस जनविरोधी पार्किंग शुल्क को तत्काल निरस्त करने की मांग करने का निर्णय लिया है।
प्रतिनिधियों का साफ कहना है कि यदि एम्स प्रशासन ने अपना यह फैसला वापस नहीं लिया, तो इसके खिलाफ उग्र आंदोलन किया जाएगा।



