औली का ओपन आइस स्केटिंग रिंक छह साल बाद भी अधूरा, पांच करोड़ खर्च के बावजूद नहीं जम सकी बर्फ

देहरादून । शीतकालीन खेलों की नगरी औली में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया ओपन आइस स्केटिंग रिंक करीब छह वर्ष बाद भी अपने पूर्ण स्वरूप में तैयार नहीं हो सका है। वर्ष 2019 में पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने इस आइस स्केटिंग रिंक का उद्घाटन किया था, लेकिन इतने वर्षों बाद भी यहां स्केटिंग के लिए आवश्यक बर्फ की परत तक नहीं जम पाई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, परियोजना पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद रिंक में करीब पांच इंच मोटी बर्फ की परत तैयार करने में विभाग सफल नहीं हो पाया है। ऐसे में शीतकालीन खेलों को बढ़ावा देने और औली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
परियोजना के अधूरे रहने से जहां सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और खेल प्रेमियों में भी निराशा है। उनका कहना है कि औली जैसे विश्व प्रसिद्ध शीतकालीन पर्यटन स्थल पर आधुनिक आइस स्केटिंग रिंक पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता था, लेकिन वर्षों बाद भी परियोजना धरातल पर पूरी तरह आकार नहीं ले सकी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब पांच करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद रिंक में निर्धारित मोटाई की बर्फ क्यों नहीं जम पा रही है और परियोजना के अधूरे रहने के लिए जिम्मेदारी किसकी है? स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से परियोजना की तकनीकी स्थिति, खर्च हुई धनराशि और अब तक किए गए कार्यों का स्पष्ट ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
यदि सरकार की ओर से परियोजना को पूरा करने की कोई नई कार्ययोजना बनाई गई है, तो उसकी समयसीमा और जिम्मेदार एजेंसी को भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है, ताकि औली का यह महत्वपूर्ण शीतकालीन खेल प्रोजेक्ट केवल उद्घाटन तक सीमित न रह जाए।
रिपोर्ट -सोनू उनियाल



