अंताल्या। भारतीय रिकर्व तीरंदाजों की नयी पीढ़ी ने रविवार को तीरंदाजी की दिग्गज टीम दक्षिण कोरिया को एक ही दिन में दो बार हराकर यहां तीरंदाजी विश्व कप के तीसरे चरण में ऐतिहासिक रूप से दो स्वर्ण पदक जीते और शानदार अंदाज में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। पेरिस ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा इस अभियान के स्टार बनकर उभरे। उन्होंने पहले 17 साल की कुमकुम मोहोद के साथ मिलकर रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में ओलंपिक चैंपियन को हराकर उलटफेर किया और पेरिस ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता दक्षिण कोरिया के ली वू सियोक को रोमांचक फाइनल में 7-3 से हराकर अपना पहला व्यक्तिगत तीरंदाजी विश्व कप स्वर्ण पदक जीता। इस तरह उन्होंने यादगार ‘स्वर्णिम डबल’ पूरा किया।
यह पहला मौका था जब भारत ने रिकर्व तीरंदाजी में अपनी सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी मानी जाने वाली दक्षिण कोरिया को हराकर एक ही विश्व कप चरण में दो स्वर्ण पदक जीते।इस प्रदर्शन की बदौलत भारत पदक तालिका में चीन (तीन स्वर्ण, एक कांस्य) के बाद दूसरे स्थान पर रहा जबकि कोरिया चौथे स्थान (1-2-1) पर खिसक गया। मेक्सिको तीसरे स्थान पर रहा।इन दो जीत ने रिकर्व स्पर्धा में भारत की वापसी को भी दिखाया जिसमें उसने लगातार विश्व कप में दो बार कोरियाई खिलाड़ियों को हराया है। पिछले महीने शंघाई विश्व कप में दीपिका कुमारी, कुमकुम और अंकिता भकत की महिला तिकड़ी ने सेमीफाइनल में रिकॉर्ड 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया की टीम को चौंकाते हुए स्वर्ण पदक जीता था।
चौबीस वर्षीय धीरज बोम्मादेवरा और कुमकुम ने रिकर्व मिश्रित टीम फाइनल में किम जे देओक और ओह ये जिन को 5-1 (37-36, 37-36, 39-39) से हराया। उन्होंने दुनिया की सबसे कामयाब जोड़ियों में से एक के खिलाफ गजब का संयम और जज्बा दिखाया।धीरज और 17 साल की कुमकुम पर कोरियाई टीम के खिलाफ खेलने का कोई दबाव नहीं दिखा। कोरियाई टीम में किम शामिल थे जो तोक्यो ओलंपिक में आन सान के साथ मिश्रित टीम स्वर्ण पदक विजेता के अलावा पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली दक्षिण कोरियाई पुरुष टीम के सदस्य भी रहे हैं।धीरज और मौजूदा सत्र में विश्व कप में पदार्पण करने वाली कुमकुम ने पूरे मुकाबले में धैर्य बनाए रखा। उन्होंने कोरियाई खिलाड़ियों को कड़ी चुनौती दी और दबाव में निर्णायक निशाने लगाए।पेरिस ओलंपियन और दुनिया के 16वें नंबर के तीरंदाज धीरज ने मुकाबले के आखिरी तीर पर परफेक्ट 10 के स्कोर से भारतीय जोड़ी की जीत सुनिश्चित की।
कुल मिलाकर दोनों ने तीन-तीन बार 10 का स्कोर किया। कुमकुम ने तीन बार नौ अंक भी जुटाए जबकि धीरज ने दो बार नौ और एक बार आठ अंक पर निशाना लगाया।दोनों तीरंदाजों का यह विश्व कप मिश्रित टीम स्पर्धा का पहला स्वर्ण पदक है।वर्ष 2024 में अंकिता भकत और 2025 में भजन कौर के साथ र्मिश्रित टीम कांस्य पदक जीतने वाले धीरज ने अंतत: स्वर्ण पदक अपने नाम किया।कुमकुम ने लगातार दूसरी बार विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता। वह शंघाई में जीत हासिल करने वाली भारत की महिला रिकर्व टीम का हिस्सा थीं और चीन के खिलाफ शूट आॅफ में जीत दिलाने वाला तीर चलाया था।संयोग से विश्व कप चरण में पर भारत का पिछला रिकर्व मिश्रित टीम स्वर्ण भी 2022 में अंताल्या में ही आया था जब रिद्धि फोर और तरुणदीप राय ने शूट आॅफ में ग्रेट ब्रिटेन की ब्रायोनी पिटमैन और एलेक्स वाइज को हराया था।
फाइनल में भारतीय जोड़ी ने अच्छी शुरुआत की जब दिग्गज किम ने सिर्फ सात और ओह ने नौ अंक हासिल किए। कोरिया ने शुरुआती दो तीर से 16 अंक बनाए।
🚨 GOLD MEDAL ALERT
🏹INDIAN MIXED RECURVE TEAM WINS GOLD AT THE ANTALYA ARCHERY WORLD CUP
Mixed Recurve Team of Dhiraj Bommadevara & Kumkum Mohod defeated Kim Je Deok/Oh Yejin🇰🇷 5-1 (37-36, 37-36, 39-39) to win Gold🥇
First World Cup stage win for Mixed Recurve Team since… pic.twitter.com/6lNsuSEiBR
— SPORTS ARENA🇮🇳 (@SportsArena1234) June 14, 2026
कुमकुम ने नौ अंक से शुरुआत की और धीरज ने आठ अंक बनाए। दूसरे प्रयास में किम के 10 और ओह ने नौ अंक के साथ वापसी करते हुए कुल स्कोर 35 अंक किया।इसके बाद कुमकुम ने नौ और धीरज ने 10 अंक हासिल किए जिससे उनका स्कोर 36 हो गया।बाद में हुई माप में कुमकुम के तीर के अंक नौ से बढ़कर 10 हो गए जबकि किम के शुरुआती तीर के अंक आठ कर दिए गए जिससे भारत ने 37-36 से सेट जीत लिया और 2-0 की बढ़त बना ली।दूसरे सेट में कोरियाई टीम दो बार नौ अंक से शुरुआत की जबकि भारतीय तीरंदाजों ने भी दो बार नौ अंक से 18 अंक जुटाए।किम ने दूसरे प्रयास में भी नौ अंक हासिल किए जबकि ओह ने भी इतने ही अंक के साथ कुल स्कोर 36 हो गया।इसके बाद कुमकुम ने नौ अंक हासिल किए जिससे धीरज को सेट जीतने के लिए परफेक्ट 10 अंक की जरूरत थी। सेना के तीरंदाज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अधिकतम अंक जुटाए जिससे भारत ने दूसरे सेट 37-36 से जीतकर बढ़त 4-0 कर दी।
स्वर्ण पदक पक्का करने के लिए भारत को सिर्फ एक सेट ड्रॉ कराने की जरूरत थी।तीसरे सेट में किम और ओह ने दो बार 10 अंक हासिल करके अच्छी शुरुआत की जबकि कुमकुम ने 10 और धीरज ने नौ अंक जुटाए।किम ने दूसरे प्रयास में फिर से 10 का स्कोर किया लेकिन ओह नौ अंक ही जुटा सकीं जिससे कोरिया का कुल स्कोर 39 रहा।भारत का स्कोर पहले दो तीर के बाद 19 था लेकिन दबाव के बावजूद कुमकुम ने 10 का स्कोर किया और ऐसा लगा कि धीरज का तीर नौ अंक पर लगा लेकिन जांच के बाद उसे 10 अंक कर दिया गया और भारत ने 39-39 के स्कोर के साथ सेट बराबर करके खिताब जीत लिया।
इस बीच कुमकुम ने लगातार दूसरा विश्व कप स्वर्ण पदक जीता। इससे पहले पिछले महीने शंघाई में उन्होंने भारत को महिला टीम का खिताब दिलाने में मदद की थी जिसमें उन्होंने चीन के खिलाफ शूट-आॅफ में जीत दिलाने वाला तीर चलाया था।
कुमकुम ने कहा कि उन्होंने विरोधी के बजाय प्रक्रिया पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा, ”मुझे खुद पर पूरा भरोसा था। मैंने बस प्रक्रिया पर ध्यान दिया और इस बारे में नहीं सोचा कि मेरे सामने कौन खड़ा है।कुमकुम ने कहा, मुझे लगता है कि मैंने शंघाई की तुलना में आज बेहतर निशाने लगाए लेकिन निश्चित रूप से वहां मिले स्वर्ण पदक ने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया।अपनी युवा साथी के बारे में धीरज ने कहा, ”सच कहूं तो जब मैं उसके साथ खेलता हूं तो उससे बहुत कुछ सीखता हूं।उन्होंने कहा, मैं अपना अनुभव तो साझा करता ही हूं लेकिन उसके निडर रवैये से और भी अधिक सीखता हूं। वह इस सोच के साथ निशाना लगाती है कि सामने कौन है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
धीरज ने कहा, हमारा टीम मंत्र है – ‘जब तक खेल खत्म नहीं हो जाए तब तक हार नहीं माननी चाहिए।’ हमने आखिरी तीर तक संघर्ष किया। हम आगे थे या पीछे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। हमने सिर्फ उन चीजों पर ध्यान दिया जो जरूरी थीं। यह पूरी तरह से टीम के बीच तालमेल की बात थी।फिर कुछ घंटों बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में दुनिया में 18वें नंबर के भारतीय सेना के तीरंदाज धीरज ने बेहतर रैंकिंग वाले कोरियाई खिलाड़ी के खिलाफ शांत रहकर शानदार प्रदर्शन किया और अपने करियर का सबसे अहम दिन यादगार बनाया।
धीरज ने शुरुआती दो सेट 30-29 और 29-28 से जीतकर 5-1 की बढ़त बना ली जबकि तीसरा सेट 27-27 से बराबरी पर छूटा।चौथे सेट में ली ने वापसी की। उन्होंने दो बार 10 और एक बार 9 का स्कोर करके सेट 29-27 से जीता जबकि धीरज परफेक्ट स्कोर नहीं बना पाए जिससे अंतर कम होकर 3-5 हो गया।लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपनी लय नहीं बिगड़ने दी। 5-3 की बढ़त के साथ धीरज ने शानदार फाइनल सेट खेलकर मुकाबला अपने नाम किया। उन्होंने लगातार तीन बार 10 (जिसमें एक ‘एक्स’ भी शामिल था) का स्कोर करके स्वर्ण पदक पक्का किया।यह स्वर्ण पदक इसलिए भी खास था क्योंकि इसने विश्व कप स्वर्ण पदक मैच में किसी कोरियाई खिलाड़ी को हराने के लिए भारतीय रिकर्व तीरंदाज के 14 साल के इंतजार को खत्म कर दिया।
इससे पहले 2012 में अंताल्या में दीपिका कुमारी ने यह कारनामा किया था।
धीरज ने जर्मनी के मोरित्ज वीजर को कड़े मुकÞाबले वाले सेमीफाइनल में 6-4 से हराकर शानदार वापसी की।धीरज पहला सेट 26-27 से हार गए। अगले दो सेट 28-28 से बराबरी पर छूटे, जिससे तीन सेट के बाद भारतीय खिलाड़ी 2-4 से पीछे हो गया।अब धीरज पर बाहर होने का खतरा मंडरा रहा था लेकिन उन्होंने जबरदस्त वापसी की। उन्होंने तीन बार 10 का स्कोर करके चौथा सेट 30-27 से जीता और स्कोर 4-4 से बराबर कर लिया।फैसले वाले सेट में दबाव के बीच वीजर का दूसरा तीर भटककर पांच पर लगा। हालांकि धीरज ने अपना संयम बनाए रखा। उन्होंने 9, 10 और 9 का स्कोर करके सेट 28-23 से जीता और अपना पहला विश्व कप फाइनल पक्का किया।
वहीं इस प्रदर्शन ने कंपाउंड टीम के बदलते हाल को भी दिखाया। हाल के समय में ऐसा पहली बार हुआ है जब वे बिना किसी पदक के लौटे हैं जबकि पिछले कुछ सत्र में इस स्पर्धा में उनका दबदबा रहा था।
भारत के कंपाउंड तीरंदाजों ने मेक्सिको के पुएब्ला में सत्र के पहले विश्व कप में महिलाओं की टीम स्वर्ण पदक जीता था और पिछले महीने शंघाई में साहिल जाधव ने कांस्य पदक हासिल किया था। जिस टीम ने हांग्झोउ एशियाई खेलों में कंपाउंड के सभी पांच स्वर्ण पदक जीते थे, उसके नतीजों में आई गिरावट को नजरअंदाजÞ करना मुश्किल होता जा रहा है, खासकर तब जब तीन महीने से भी कम समय में आइची-नागोया एशियाई खेल होने वाले हैं।
कोच राहुल बनर्जी ने कहा, ”कंपाउंड तीरंदाजों के लिए यह वाकई चिंता की बात है। यह अजीब बात है कि जब रिकर्व का प्रदर्शन बेहतर हो रहा है, तो कंपाउंड में गिरावट दिख रही है। हमने 2008-2012 के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखा था जब रिकर्व का दबदबा था। बाद में कंपाउंड का दबदबा शुरू हुआ। हमें कोई रास्ता निकालना होगा। सही योजना की जरूरत है।