मुख्य सामग्री पर जाएं
हिंदी संस्करण
पायनियर स्वतंत्र · निष्पक्ष · निर्भीक
उत्तर प्रदेश

लाखों की सड़क या मानकों की खुली लूट? धनेवा मोड़ पर निर्माण की हकीकत ने खोली पोल

महराजगंज। विकास के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर निर्माण की गुणवत्ता देखकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सरकारी धन का इस्तेमाल विकास के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों पर…

साझा करें WhatsAppFacebookX
लाखों की सड़क या मानकों की खुली लूट? धनेवा मोड़ पर निर्माण की हकीकत ने खोली पोल

महराजगंज। विकास के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर निर्माण की गुणवत्ता देखकर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सरकारी धन का इस्तेमाल विकास के लिए हो रहा है या सिर्फ कागजों पर काम पूरा करने के लिए? धनेवा मोड़ से गबडुआ की तरफ बन रही सीसी सड़क और नाली निर्माण की तस्वीरें कम से कम यही सवाल खड़ा कर रही हैं। जिला विकास अभिकरण (डूडा) द्वारा कराए जा रहे निर्माण कार्य में स्थानीय लोगों ने मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए हैं। सूत्रों के अनुसार निचलौल धनेवा मोड़ से करीब 252 मीटर सीसी सड़क पर लगभग लगभग 47 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। वहीं नथुनी व दुःखी के घर से नहर पुल तक करीब 201 मीटर सीसी सड़क और नाली निर्माण पर करीब 38 लाख रुपये की लागत बताई जा रही है। यानी दोनों कार्यों पर लाखों रुपये का सरकारी बजट खर्च हो रहा है। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवाल जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उंगली उठा रहे हैं।गबडुआ निवासी शब्बीर अली ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर काम कराया जा रहा है।

उनका कहना है कि सीसी सड़क के नीचे डाली जा रही जीएसबी की मोटाई निर्धारित मानको के मुकाबले कई जगह काफी कम दिखाई दे रही है। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर निर्माण का तकनीकी मानक किस आधार पर तय किया जा रहा है और उसकी निगरानी कौन कर रहा है?सड़क की मजबूती उसकी ऊपरी चमक से नहीं, बल्कि नीचे तैयार की गई मजबूत आधार पर निर्भर करती है। लेकिन यहां आरोप है कि गिट्टी को पर्याप्त तरीके से बैठाने और दबाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। स्थानीय लोगों का दावा है कि निर्माण स्थल पर रोलर का पर्याप्त इस्तेमाल भी नहीं किया जा रहा, जबकि सड़क की नींव को मजबूत करने में इसकी अहम भूमिका होती है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नीचे की परत ही मानक के अनुरूप तैयार नहीं होगी तो ऊपर डाली जाने वाली सीसी परत सड़क को कितने समय तक मजबूती दे पाएगी? बरसात और भारी वाहनों का दबाव बढ़ने के बाद सड़क की वास्तविक गुणवत्ता सामने आने की आशंका जताई जा रही है।निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल सिर्फ जीएसबी तक सीमित नहीं हैं। सड़क के कई स्थानों पर एजिंग उखड़ी हुई होने की बात भी सामने आई है। निर्माण के शुरुआती दौर में ही यदि किनारे की संरचना कमजोर पड़ने लगे तो भविष्य में सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।


लाखों के काम पर जिम्मेदारों की चुप्पी क्यों?सबसे गंभीर सवाल निर्माण से ज्यादा उसकी निगरानी को लेकर है। जब लाखों रुपये की परियोजना चल रही है तो क्या विभागीय अधिकारी नियमित रूप से मौके पर निरीक्षण कर रहे हैं लोगों की मांग है कि दोनों निर्माण कार्यों की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए। मौके पर जीएसबी की मोटाई, सामग्री की गुणवत्ता, कुटाई, एजिंग और सीसी निर्माण की मोटाई की जांच कराई जाए। यदि जांच में मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार ठेकेदार और निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका तय करते हुए कार्रवाई की जाए।इस पूरे मामले पर

जिले में चर्चित जेई योगेश तिवारी ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्य में किसी तरह की कमी नहीं है। मौके पर समय-समय पर पहुंचकर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई है, जिसमें सब कुछ संतोषजनक मिला।

टैग:
लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

लेखक की सभी खबरें →