कन्याकुमारी (तमिलनाडु)। विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र के अध्यक्ष ए. बालकृष्णन नहीं रहे। उन्होंने बुधवार देर रात्रि 12.05 बजे अंतिम सांस ली। वह 88 वर्ष के थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उनके निधन पर गहरा दुख प्रकट किया है।
विवेकानंद शिला स्मारक एवं विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी के मुताबिक बालकृष्णन ने बुधवार देर रात्रि 12:05 बजे अंतिम सांस ली। तीन मई 1938 को केरल (अब केरलम्) में जन्मे बालकृष्णन भारतीय वायुसेना में कुछ समय तक रहने के बाद 1973 में विवेकानंद केंद्र के जीवनव्रती कार्यकर्ताओं के पहले बैच में शामिल हुए। केंद्र ने अपने शोक संदेश में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन एक कर्मयोगी का उदाहरण है। उन्होंने विवेकानंद केंद्र को एक जीवंत स्मारक बनाने के एकनाथ राना डे के सपने को पूरा कर ने और भारत माता की सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया। एकनाथ जी के आह्वान से प्रेरित होकर उन्होंने अपना प्रशिक्षण पूरा किया। इसके बाद उन्हें अरुणाचल प्रदेश भेजा गया। उस समय यह राज्य 1962 के भारत-चीन युद्ध के असर से उबर रहा था। वहां उन्होंने शिक्षा के माध्यम से ज्ञान का प्रसार किया और विवेकानंद केंद्र के एकमात्र उद्देश्य 'मानव निर्माण और राष्ट्र निर्माणके मिशन को आगे बढ़ाया।
अरुणाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी कार्य करने के लिए राज्य सरकार ने 2014 में उन्हें उनकी
उत्कृष्ट सेवा के लिए राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया। उनका जीवन कर्मयोगी का उदाहरण है। उन्होंने
विवेकानंद केंद्र को जीवंत स्मारक बनाने के एकनाथ रानाडे के सपने को पूरा करने और भारत माता की
सेवा के लिए खुद को समर्पित कर दिया। बालकृष्णन के निधन पर प्रधानमंत्री ने गहरा शोक प्रकट किया है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपने शोक संदेश में लिखा, “बालकृष्णन ने अपने जीवन के पांच दशक से अधिक का समय स्वामी विवेकानंद के आदर्शों और समाज की सेवा में समर्पित किया। विवेकानंद केंद्र के शुरुआती जीवनव्रतियों में से एक के तौर पर उन्होंने पूरे देश में अथक परिश्रम किया। पूर्वोत्तर भारत के साथ उनका विशेष और गहरा जुड़ाव था। उन्होंने शिक्षा, समाज-सेवा और राष्ट्र-निर्माण से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विवेकानंद केंद्र के पूरे परिवार और उनके प्रशंसकों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं।
संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने एक संयुक्त शोक संदेश में कहा, “बालकृष्णन जी स्वामी विवेकानन्द जी के कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कन्याकुमारी स्थित विवेकानन्द केन्द्र के आजीवन समर्पित स्वयंसेवक-दल के प्रारम्भिक पीढ़ी के स्वयंसेवक थे। उनके निधन से हिन्दू समाज ने एक महान आत्मा को खो दिया है। उनके देवलोक गमन से उत्पन्न हुई रिक्तता की पूर्ति अत्यन्त कठिन है। हम दिवंगत बालकृष्णन जी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं तथा परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि इस पुण्यात्मा को परम गति एवं मोक्ष प्रदान करें।
संघ ने कहा कि बालकृष्णन कर्मयोग की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन स्वामी विवेकानन्द के विश्वबंधुत्व तथा सहिष्णुता के संदेश के प्रसार और राष्ट्र एवं समाज की सेवा में समर्पित कर दिया। उनका सरल जीवन, निःस्वार्थ सेवा, त्याग एवं हिन्दुत्व के प्रति उनकी अटूट निष्ठा भारतवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।