ए के दुबे
लखनऊ। जर्नलिस्ट मीडिया प्रेस एसोसिएशन के तत्वावधान में मंगलवार को यूपी प्रेस क्लब लखनऊ में राष्ट्र प्रेम के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर भरत तिवारी की पावन स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर साहित्यिक आयोजन ‘कविताई 3.0’ का भी आयोजन हुआ, जिसमें कवियों ने अपनी रचनाओं से समसामयिक विषयों को स्वर दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वेश तिवारी ने कहा कि भरत तिवारी जैसा राष्ट्र और समाज के प्रति समर्पण आज भी प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि समाज सेवा का जज़्बा अडिग होना चाहिए, लेकिन उसके लिए हथियार नहीं, बल्कि कानून और संविधान का मार्ग अपनाना आवश्यक है। उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित याचिका, सूचना का अधिकार (आरटीआई), शांतिपूर्ण आंदोलन, अनशन और अन्य संवैधानिक माध्यमों के जरिए अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने पर जोर दिया।
वक्ता ओम मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में जब राजनीति जातीय मुद्दों के इर्द-गिर्द सिमटती जा रही है, ऐसे दौर में भरत तिवारी का जीवन समाज और राष्ट्र को जातीय सीमाओं से ऊपर उठकर देखने की प्रेरणा देता है। काव्य गोष्ठी में कवि योगेश शुक्ल ने अपनी कविता “क्या आम जन से वोट लेते, फिर उन्हीं को चोट देते” प्रस्तुत कर समकालीन राजनीतिक परिस्थितियों पर कटाक्ष किया। वहीं कुलदीप शुक्ला ने “राष्ट्रवाद के बल पर ही तुमने सत्ता पाई है, गीदड़ भभकी से मत डरना, जग में बहुत हँसाई है” रचना सुनाकर श्रोताओं की सराहना बटोरी। कवि अनुराग मिश्र ‘राग’ ने “तारीखें तारीखें, देती अदालत और पैरों में छाले हैं” कविता के माध्यम से न्याय व्यवस्था की चुनौतियों को स्वर दिया। कार्यक्रम में ज्ञान प्रकाश आकुल की समकालीन कविता “बिना किसी अपराध श्रवण को मार दिया सम्राट ने” पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के संरक्षक रामानंद शास्त्री, प्रदेश अध्यक्ष उमाशंकर पांडे, प्रदेश महामंत्री अश्वन वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष सर्वेश तिवारी, शीलादित्य पांडे, डॉ. मनोहर गुप्ता तथा मनोज शेखर गुप्ता सहित अनेक पदाधिकारी, पत्रकार, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अंत में वीर भरत तिवारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया गया।










