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अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज मामले में बड़ा फैसला, NIA कोर्ट ने 15 बांग्लादेशी और रोहिंग्या दोषियों को सुनाई 5-5 साल की सजा

लखनऊ स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट ने अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 15 दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही…

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अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेज मामले में बड़ा फैसला, NIA कोर्ट ने 15 बांग्लादेशी और रोहिंग्या दोषियों को सुनाई 5-5 साल की सजा

लखनऊ स्थित एनआईए स्पेशल कोर्ट ने अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और मानव तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने 15 दोषियों को पांच-पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 28-28 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले को देश की सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के खिलाफ चल रही कार्रवाई के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है।

मामला बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश दिलाने और उनके लिए फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कराने से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, एक संगठित सिंडिकेट लंबे समय से इस अवैध नेटवर्क को संचालित कर रहा था। इस नेटवर्क के जरिए विदेशी नागरिकों को भारत लाया जाता था और बाद में उन्हें भारतीय नागरिक दर्शाने के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्र तैयार कराए जाते थे।

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) की जांच में सामने आया था कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। आरोपियों ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश दिलाने के बाद उनके लिए फर्जी दस्तावेजों की व्यवस्था की। कई मामलों में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट भी बनवाए गए, जिससे उनकी पहचान छिपाई जा सके।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि नेटवर्क से जुड़े लोग मानव तस्करी के जरिए कई व्यक्तियों को अन्य देशों में भेजने का काम भी कर रहे थे। एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा गिरोह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका था। दोषियों में महफूज, समीर मंडल उर्फ टोनी समेत कई ऐसे आरोपी शामिल थे, जो इस पूरे सिंडिकेट के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

एटीएस के मुताबिक, अधिकांश आरोपी पश्चिम बंगाल में अलग-अलग स्थानों पर छिपकर रह रहे थे। लंबे समय तक निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद अक्टूबर 2021 में विभिन्न स्थानों पर एक साथ कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच की गई और अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए गए।

अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध सबूतों, दस्तावेजों और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर सभी 15 आरोपियों को दोषी करार दिया। कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने अवैध घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और मानव तस्करी जैसी गंभीर गतिविधियों में भागीदारी की थी, जो कानून के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती हैं।

एनआईए स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस तरह के संगठित गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

 

लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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