- एसएसपी स्थापना दिवस पर आर्टेमिस हॉस्पिटल्स द्वारा क्रॉनिक पेन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की पहल
गुड़गांव। दर्द चिकित्सा (पेन मेडिसिन) को बढ़ावा देने तथा लंबे समय से दर्द (क्रॉनिक पेन) से पीड़ित मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन (एसएसपी), गुरुग्राम सिटी ब्रांच ने आर्टेमिस हॉस्पिटल्स के सहयोग से अपने स्थापना दिवस के अवसर पर एक विशेष जन-जागरूकता अभियान का आयोजन किया।
इस पहल का उद्देश्य भारत में बढ़ते क्रॉनिक पेन के बोझ को उजागर करना, समय पर निदान को बढ़ावा देना, बहु-विषयक उपचार पद्धति को प्रोत्साहित करना तथा लोगों को यह संदेश देना था कि क्रॉनिक पेन एक उपचार योग्य चिकित्सीय स्थिति है।
इस कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. आशु के. जैन, अध्यक्ष, एसएसपी गुरुग्राम सिटी ब्रांच एवं प्रमुख, पेन मेडिसिन एवं पेलिएटिव केयर, आर्टेमिस हॉस्पिटल्स, डॉ. राज कुमार, उपाध्यक्ष, डॉ. आंचल शर्मा, सचिव, डॉ. नम्रता दाबस, संयुक्त सचिव तथा डॉ. आशीष चक्रवर्ती, कोषाध्यक्ष ने किया।
इस मौके पर डॉ. आशु के. जैन ने कहा, दर्द को जीवन का सामान्य हिस्सा मानकर कभी भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। समय पर उपचार से जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
क्रोनिक पेन सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है क्योंकि यह मरीजों की रोजमर्रा की गतिविधियां करने, काम करने और सोने की क्षमता को प्रभावित करता है। यह भी पाया गया कि लगातार रहने वाला दर्द मरीज की मानसिक सेहत पर बुरा असर डालता है।
क्रॉनिक पेन आज विश्वभर में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। वैश्विक अनुमानों के अनुसार लगभग हर पांच में से एक वयस्क इससे प्रभावित है। भारत में लगभग 19-20 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी प्रकार के लंबे समय तक रहने वाले दर्द से प्रभावित हैं, जिससे उनकी कार्यक्षमता, मानसिक स्वास्थ्य, नींद और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
डॉ. राज कुमार ने कहा, आधुनिक इंटरवेंशनल तकनीकों ने क्रॉनिक पेन के उपचार को नई दिशा दी है। जागरूकता ही समय पर उपचार का पहला कदम है।डॉ. आंचल शर्मा ने बताया कि, प्रभावी दर्द प्रबंधन के लिए बहु-विषयक विशेषज्ञों का समन्वित प्रयास आवश्यक है। डॉ. नम्रता दाबस ने कहा, लगातार रहने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका प्रभावी उपचार उपलब्ध है। डॉ. आशीष चक्रवर्ती के अनुसार शिक्षा, नवाचार और सहयोग आधुनिक पेन मेडिसिन की आधारशिला हैं।










