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राज्यपाल ने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय से जुड़ी कथित धर्मांतरण घटनाओं की रिपोर्टों के बाद दिए निर्देश
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। यूपी की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने राज्य के सभी चिकित्सा, दंत चिकित्सा तथा अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों को परिसरों में ‘प्रलोभन या मानसिक दबाव’ के माध्यम से धर्मांतरण के प्रयासों को रोकने के लिए छात्र कल्याण प्रकोष्ठ स्थापित करने का निर्देश दिया है।
यह निर्देश लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) और संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) से जुड़ी कथित धर्मांतरण घटनाओं की रिपोर्टों के बाद जारी किया गया। इसके अनुपालन में अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विश्वविद्यालय ने छह जून को अपने सभी संबद्ध महाविद्यालयों को इन निर्देशों को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने को कहा है।
राज्यपाल सचिवालय की ओर से 28 मई को जारी एक पत्र में संस्थानों को ‘सुरक्षित, धर्मनिरपेक्ष और शैक्षणिक वातावरण’ सुनिश्चित करने तथा ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने का निर्देश दिया गया था। पत्र में कहा गया है कि शैक्षणिक संस्थान ‘केवल ज्ञान और नवाचार के केंद्र ही नहीं, बल्कि युवाओं के नैतिक, बौद्धिक और सामाजिक विकास की आधारशिला भी हैं’ और उनके परिसर ‘शैक्षणिक उत्कृष्टता, बौद्धिक स्वतंत्रता और सद्भाव’ के केंद्र बने रहने चाहिए। राज्यपाल कार्यालय ने संस्थानों को कट्टरवाद-रोधी अथवा छात्र कल्याण प्रकोष्ठों को सक्रिय करने, परामर्श तंत्र को सुदृढ़ बनाने, छात्रावासों एवं संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ाने तथा अनधिकृत बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
पत्र में कहा गया है कि भय, मानसिक दबाव या अनैतिक प्रलोभन के माध्यम से छात्रों को प्रभावित कर अवैध अथवा जबरन धर्म परिवर्तन कराने का कोई भी प्रयास ‘अस्वीकार्य और कानून के विरुद्ध’ है। संस्थानों को जागरुकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस और स्थानीय प्रशासन को सूचित करने का भी निर्देश दिया गया है। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विश्वविद्यालय ने सभी संबद्ध महाविद्यालयों से तत्काल कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।










