उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस के अनुसार, ध्वस्तीकरण के दौरान परिसर से ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे 49 पोस्टर और पाकिस्तान के झंडे से मिलता-जुलता एक हरा झंडा बरामद हुआ, जिसके बाद आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस का कहना है कि संबंधित मस्जिद को कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित किया गया था। इसी आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उसे हटाया। मामले में मस्जिद के मुतवल्ली जाकिर समेत आठ लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ‘आई लव मोहम्मद’ लिखे पोस्टर या हरा झंडा रखना कोई अपराध नहीं है। बर्क ने दावा किया कि संबंधित मस्जिद लगभग 150 वर्ष पुरानी है और वर्ष 1995 में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया गया था। उन्होंने इस कार्रवाई को अवैध बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है।
सांसद ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा अपने धर्म और पैगंबर के प्रति प्रेम व्यक्त करना अपराध नहीं माना जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन का उद्देश्य लोगों में विश्वास पैदा करना होना चाहिए, न कि भय का माहौल बनाना।
उधर, जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को पूरी तरह कानूनी बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद करीब 1,200 वर्ग मीटर कब्रिस्तान की भूमि पर बनी हुई थी। प्रशासन का कहना है कि राजस्व न्यायालय द्वारा निष्कासन आदेश जारी किए गए थे और मस्जिद समिति अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि संबंधित अपील भी खारिज कर दी गई थी, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। वहीं, पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई के अनुसार, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में शांतिपूर्वक कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन तथा स्थानीय पक्षों के दावों को लेकर बहस तेज हो गई है।










