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तीन बर्षीय बच्चे को दुर्लभ व जानलेवा बीमारी से बचाया

तीन बर्षीय बच्चे को दुर्लभ व जानलेवा बीमारी से बचाया
  • एसजीपीजीआई के डाक्टरों ने किया सफतापूर्वक उपचार
  • यह एक दुर्लभ बीमारी है जो लगभग पांच लाख लोगों में से किसी एक को होती है

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। संजय गांधी पी.जी.आई लखनऊ के चिकित्सकों ने होमोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया नामक गंभीर और जानलेवा आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित तीन वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक उपचार किया है। यह दुर्लभ बीमारी लगभग पांच लाख लोगों में से किसी एक को होती है और इसमें जन्म से ही रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर अत्यधिक बढ़ा रहता है। इस बीमारी में शरीर रक्त से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को प्रभावी रूप से बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण त्वचा और नसों पर कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है। इससे हृदय की धमनियां संकरी होने हृदय के वाल्व खराब होने और दिल का दौरा पड़ने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। उपचार न मिलने पर कभी-कभी 20 वर्ष की आयु से पहले ही मृत्यु भी हो सकती है।

बच्चे की प्रारंभिक जांच मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में की गई, जहां इस दुर्लभ बीमारी का पता चला। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाएं अधिक मात्रा में दिए जाने के बावजूद बच्चे का कोलेस्ट्रॉल स्तर 854 मिलीग्राम डीएल बना रहा जो सामान्य स्तर से कई गुना अधिक था। कुछ अन्य दवाएं या तो इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए उपयुक्त नहीं थीं अथवा अत्यधिक महंगी थीं। इसलिए रक्त से कोलेस्ट्रॉल निकालने के लिए बच्चे को अफेरेसिस उपचार के लिए ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में भेजा गया। एलडीएल अफेरेसिस जैसी अत्यधिक विशिष्ट प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रखने के लिए बहुत महंगी थी। इसलिए विभाग की टीम ने बच्चे की आयु और आवश्यकता के अनुसार विशेष पीडियाट्रिक थेराप्यूटिक प्लाज्मा एक्सचेंज प्रोटोकॉल तैयार किया।

इस प्रक्रिया में बच्चे के रक्त को अफेरेसिस मशीन से गुजारा गया। मशीन ने रक्त से कोलेस्ट्रॉल युक्त प्लाज्मा को अलग करके बाहर निकाला। निकाले गए प्लाज्मा के स्थान पर उपयुक्त प्रतिस्थापन द्रव दिया गया और रक्त के बाकी उपयोगी घटकों को सुरक्षित रूप से बच्चे के शरीर में वापस पहुंचाया गया। बच्चे का 20 सप्ताह तक प्रत्येक सप्ताह ओपीडी आधार पर प्लाज्मा एक्सचेंज किया गया। प्रत्येक प्रक्रिया के बाद कोलेस्ट्रॉल के स्तर में औसतन लगभग 70 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। बच्चे ने सभी प्रक्रियाओं को अच्छी तरह सहन किया और कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।

त्वचा पर दिखाई देने वाले कोलेस्ट्रॉल जमाव में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई। परिवार की परिस्थितियों और लगातार उपचार की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए कुछ प्रक्रियाएं निःशुल्क भी की गईं। डॉ. भरत सिंह के अनुसार यह भारत में से पीड़ित उन सबसे कम उम्र के रिपोर्ट किए गए बच्चों में से एक है, जिसका उपचार लगातार कई प्लाज्मा एक्सचेंज प्रक्रियाओं से किया गया। यह मामला दुर्लभ और जटिल बाल रोगों के उपचार में एसजीपीजीआईएमएस की उन्नत थेराप्यूटिक अफेरेसिस सेवाओं और विशेषज्ञता को दर्शाता है।

उपचार का समन्वय ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. भरत सिंह और मेडिकल जेनेटिक्स विभाग की डॉ. अमिता मोइरांगथेम ने किया। इसमें ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रो. प्रीति एल्हेंस प्रो. अनुपम वर्मा और डॉ. अजय जोसेफ का भी योगदान रहा। इस बीमारी की समय पर पहचान और उचित उपचार से इसकी कई गंभीर जटिलताओं को रोका जा सकता है। एसजीपीजीआईएमएस के निदेशक पद्मश्री प्रो. आरके धीमन ने इस कार्य की सराहना की और पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई दी।

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