प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर भले ही अब धीरे-धीरे नीचे आ रहा हो, लेकिन बाढ़ का संकट पूरी तरह टला नहीं है। दोनों प्रमुख नदियां अभी भी उफान पर बनी हुई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटे में गंगा और यमुना के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। दोनों नदियां फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।
गंगा-यमुना के जलस्तर में गिरावट
प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति के बीच नदी के जलस्तर में आई कमी को प्रशासन और प्रभावित लोगों के लिए राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। नैनी में यमुना का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 11 सेंटीमीटर कम हुआ है। वहीं फाफामऊ में गंगा के जलस्तर में 46 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई है।
जलस्तर में कमी के बावजूद नदियों का बहाव अभी सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी जारी है। खासकर नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
22 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में
प्रयागराज जिले में बाढ़ का असर अभी भी कई ग्रामीण इलाकों में बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक जिले के 22 गांव अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं। इन क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित रखने और जरूरत के मुताबिक राहत पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर इंतजाम किए जा रहे हैं। बाढ़ के कारण कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रशासन की ओर से बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को ठहराया गया है।
तीन राहत शिविरों में 52 परिवार
प्रयागराज में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए तीन बाढ़ राहत शिविरों में फिलहाल 52 परिवार मौजूद हैं। इन शिविरों में कुल 220 लोग शरण ले चुके हैं। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है, ताकि बाढ़ का पानी कम होने तक उन्हें सुरक्षित स्थान मिल सके। प्रशासन के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ प्रभावित गांवों तक राहत और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की है। जलस्तर में गिरावट के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी समय लग सकता है।
जलस्तर घटने से राहत की उम्मीद
गंगा और यमुना के जलस्तर में आई गिरावट ने बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ प्रशासन को भी राहत दी है। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 46 सेंटीमीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 11 सेंटीमीटर कम होना सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।हालांकि दोनों नदियां अभी उफान पर हैं और 22 गांवों में बाढ़ का असर कायम है। इसलिए प्रशासन की निगरानी और राहत कार्यों को फिलहाल जारी रखना जरूरी है। आने वाले घंटों में जलस्तर में और कितनी गिरावट आती है, इससे प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति सामान्य होने की दिशा तय होगी।फिलहाल राहत की सबसे बड़ी खबर यही है कि गंगा और यमुना दोनों खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं, लेकिन प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।