पीलीभीत। नगर पंचायत पकड़िया नौगवां की चेयरमैन संदीप कौर के पति प्रतिनिधि संतोख सिंह संधू ने रविवार को अपने स्थायी कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में जिला प्रशासन की कार्यशैली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पंचायत के 14 विकास कार्यों की दूसरी किस्त की 4 करोड़ 2 लाख 90 हजार 408 रुपये की फाइलें करीब डेढ़ साल तक अधिकारियों की मेजों पर धूल फांकती रहीं, जिससे विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए।संधू ने बताया कि नगर पंचायत में कुल 5 करोड़ 36 लाख 41 हजार रुपये की लागत से 14 विकास कार्य प्रस्तावित थे। पहली किस्त का भुगतान पहले ही प्राप्त हो चुका था, लेकिन दूसरी किस्त की फाइलें लंबे समय तक लंबित रहने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कई फाइलें तीन-तीन महीने तक एक ही टेबल पर पड़ी रही और बार-बार अनुरोध के बावजूद अधिकारियों ने उन्हें आगे नहीं बढ़ाया ।
उन्होंने कहा कि जब वह स्वयं लगातार 15 दिन तक लखनऊ में डटे रहे और शासन स्तर पर अधिकारियों से लगातार संपर्क किया, तब जिला प्रशासन सक्रिय हुआ और महज 24 घंटे के भीतर पूरी फाइल तैयार कर शासन को भेज दी, जिसके बाद दूसरी किस्त स्वीकृत हुई।संधू ने सवाल उठाया कि जब फाइलें एक दिन में तैयार हो सकती थी तो जनता को डेढ़ साल तक विकास कार्यों से क्यों वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाता तो सड़क, नाली सहित सभी 14 विकास कार्य काफी पहले पूरे हो चुके होते। उन्होंने चेतावनी दी कि जनहित के विकास कार्यों में लापरवाही और अनावश्यक देरी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा जनता के अधिकारों के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
छवि खराब करने की साजिश के तहत रोकी गई विकास कार्यों की फाइलें: संतोख सिंह संधू
नगर पंचायत पकड़िया नौगवां की चेयरमैन प्रतिनिधि संतोख सिंह संधू ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत की छवि धूमिल करने की मंशा से विकास कार्यों की फाइलों को लंबे समय तक जानबूझकर रोके रखा गया। उन्होंने कहा कि कई निर्माण कार्यों की फाइलें महीनों तक टेबलों पर धूल फांकती रहीं, जिससे विकास कार्य प्रभावित हुए और जनता को असुविधा का सामना करना पड़ा। संधू ने दावा किया कि जब उन्होंने 15 दिनों तक लखनऊ में लगातार प्रयास किए, तब जिला प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर फाइलें शासन को भेज दी और उसके बाद बजट स्वीकृत हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फाइलें एक दिन में भेजी जा सकती थीं तो उन्हें इतने लंबे समय तक क्यों रोका गया।
रिपोर्ट-अदनान खान










