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सत्ता के मद में डूबे कंस का अंतर्द्वंद्व मंच पर हुआ साकार

सत्ता के मद में डूबे कंस का अंतर्द्वंद्व मंच पर हुआ साकार

पायनियर समाचार सेवा

लखनऊ। सत्ता की असीम चाह, अहंकार का उन्माद, मन के भीतर पलता भय और नियति से संघर्ष इन सभी भावों को समेटे प्रसिद्ध नाटककार दया प्रकाश सिन्हा के चर्चित नाटक ‘कथा एक कंस की’ का मंचन ओजस प्रेक्षागृह, डोमिनेंस इंटरनेशनल स्कूल, चिनहट, में किया गया। यूपी संस्कृति विभाग के सहयोग से नाट्य संस्था विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर द्वारा आयोजित इस प्रस्तुति का निर्देशन चन्द्रभाष सिंह ने किया। पौराणिक कथानक को समकालीन संवेदनाओं और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से प्रस्तुत करती इस नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को आरंभ से अंत तक बांधे रखा। मंच पर कंस केवल एक क्रूर और अत्याचारी राजा के रूप में नहीं, बल्कि भय, असुरक्षा, महत्वाकांक्षा और सत्ता के मोह में उलझे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसके भीतर निरंतर एक गहरा मानसिक संघर्ष चल रहा है।

नाटक में कंस के जीवन से जुड़े रिश्तों, प्रेम, सत्ता की लालसा और भविष्य के भय को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया। संवादों और दृश्यों के माध्यम से यह प्रश्न भी उभरकर सामने आया कि जब सत्ता व्यक्ति के विवेक पर हावी हो जाती है, तो उसका परिणाम केवल उसके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए कितना विनाशकारी हो सकता है। प्रस्तुति की विशेषता कलाकारों का सशक्त और भावपूर्ण अभिनय रहा। प्रकाश योजना, संगीत, वेशभूषा और मंच संयोजन ने नाटक के वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

कलाकारों ने अपने अभिनय से पात्रों के भीतर चल रहे भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक संघर्ष को जीवंत कर दिया। कई दृश्यों में दर्शक पूरी तरह नाटक के कथानक से जुड़ गए और प्रेक्षागृह तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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