15 मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड, दो एटीएम कार्ड, 22,260 रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त कार बरामद
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। मोबाइल चोरी को साइबर ठगी का जरिया बनाकर लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपये पार करने वाले अंतरजनपदीय गिरोह का कमिश्नरेट पुलिस ने पर्दाफाश किया है। थाना सैरपुर पुलिस और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 15 मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड, दो एटीएम कार्ड, 22,260 रुपये नकद तथा वारदात में प्रयुक्त कार बरामद की है। अपर पुलिस उपायुक्त लखनऊ उत्तरी ट्विंकल जैन ने बताया कि गिरोह चोरी किए गए मोबाइल फोन में मौजूद बैंकिंग एप्लीकेशन और डिजिटल भुगतान सुविधाओं का दुरुपयोग कर खाताधारकों की जानकारी के बिना बैंक खातों से धनराशि निकालता था।
कमलाबाद बढ़ौली निवासी सरोज कुमार ने थाना सैरपुर में शिकायत दर्ज कराई थी कि अज्ञात व्यक्ति उनका मोबाइल फोन चोरी कर ले गए। इसके बाद मोबाइल में मौजूद बैंकिंग एप और यूपीआई सेवाओं का उपयोग कर उनके बैंक खाते से 1.36 लाख रुपये तथा पंजाब नेशनल बैंक खाते से 54 हजार रुपये निकाल लिए गए।मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सैरपुर में मुकदमा दर्ज कर विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सर्विलांस, सीसीटीवी फुटेज और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की तलाश शुरू की।
इसी क्रम में सूचना मिली कि मोबाइल चोरी और साइबर ठगी में शामिल कुछ लोग किसान पथ क्षेत्र से एक सफेद रंग की हुंडई वर्ना कार से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन को रोक लिया और उसमें सवार पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नरेंद्र सिंह उर्फ अजय निवासी औरैया, देवराज निवासी शाहजहांपुर, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव निवासी हाथरस, रामसुमिरन निवासी हरदोई तथा सत्यम उर्फ सुनील कुमार निवासी औरैया के रूप में हुई है। पुलिस ने वाहन की तलाशी में आठ मोबाइल फोन,सात सिम कार्ड, चार्जर, मल्टी चार्जिंग केबल और 19 हजार रुपये नकद बरामद किए।
इसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर सात अन्य मोबाइल फोन,दो एटीएम कार्ड और 3,260 रुपये नकद भी बरामद किए गए। पुलिस ने बरामद हुंडई वर्ना कार संख्या (यूपी 32 जेपी 4200) को भी सीज कर दिया है। पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे भीड़भाड़ वाले बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और यात्रियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में मोबाइल फोन चोरी करते थे। चोरी किए गए मोबाइल में मौजूद बैंकिंग एप्लीकेशन,सिम कार्ड और डिजिटल भुगतान सुविधाओं का उपयोग कर नई यूपीआई आईडी तैयार की जाती थी। इसके बाद खाताधारकों की जानकारी के बिना बैंक खातों से रकम ट्रांसफर कर निकाली जाती थी। पुलिस के मुताबिक गिरोह संगठित तरीके से साइबर धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों को अंजाम दे रहा था।










