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क्या शाहजहांपुर से बदलेगा सपा का सियासी गणित?

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। शाहजहांपुर जनपद की सीटों पर लगातार दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) में भाजपा से हार का सामना करने के बाद सपा इस बार नए सामाजिक…

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क्या शाहजहांपुर से बदलेगा सपा का सियासी गणित?

2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। शाहजहांपुर जनपद की सीटों पर लगातार दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) में भाजपा से हार का सामना करने के बाद सपा इस बार नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का पारंपरिक यादव-मुस्लिम वोट बैंक उसके साथ माना जाता है, लेकिन अब ब्राह्मण मतदाताओं को भी अपने पक्ष में जोड़ने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। पांच अगस्त को लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए की नई व्याख्या करते हुए कहा था कि ‘पी’ का अर्थ पंडित भी है। कृष्ण और सुदामा के संबंध का उल्लेख कर उन्होंने ब्राह्मण समाज को राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र सपा की व्यापक सामाजिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी बरेली मंडल में ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है, तो वरिष्ठ सपा नेता एवं पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद को शाहजहांपुर से चुनाव मैदान में उतारना पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम साबित हो सकता है। जयेश प्रसाद का प्रभाव शाहजहांपुर के साथ-साथ बरेली, पीलीभीत, बदायूं, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और हरदोई जैसे ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्रों में भी माना जाता है। ऐसे में उन्हें चुनावी मैदान में उतारकर सपा ब्राह्मण मतदाताओं के बीच बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर सकती है।दूसरी ओर, भाजपा लंबे समय से ब्राह्मण समाज सहित विभिन्न वर्गों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। ऐसे में सपा की यह नई रणनीति भाजपा के पारंपरिक समर्थन आधार में सेंध लगाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि, चुनावी राजनीति में सामाजिक समीकरणों के साथ उम्मीदवार की स्वीकार्यता, स्थानीय संगठन और बूथ प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी टिकट वितरण और चुनावी रणनीति के जरिए अपने इस नए सामाजिक समीकरण को किस तरह जमीन पर उतारती है। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या सपा की यह रणनीति भाजपा के मजबूत वोट बैंक में प्रभावी सेंध लगाने में सफल हो पाती है या नहीं।

 

गौरव मिश्रा/शाहजहांपुर

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लेखक

Rashmi Singh

रश्मि सिंह मास कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर हैं और मीडिया एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखती हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ग्राउंड रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन से की तथा समय के साथ देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और समाचार चैनलों में कार्य किया। राजनीति, समसामयिक घटनाक्रम, उत्तर प्रदेश की खबरों, सामाजिक मुद्दों और मनोरंजन जगत की रिपोर्टिंग एवं विश्लेषण में उन्हें विशेष अनुभव प्राप्त है। डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने तथ्यपरक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता को अपनी पहचान बनाया है।

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