पिता की मौत के बाद मां ने हौसला दिया, भाई-बहन ने मेहनत से साकार किया पिता का सपना

- सुशील बने असिस्टेंट इनकम टैक्स आॅफिसर, रेखा का एलोपैथिक फामेर्सी अधिकारी
- सफलता पर भावुक मां ने बोला-आज उनके पिता होते तो खुशी और बड़ी होती
- प्रेस क्लब खटीमा तथा पेबैक टू सोसाइटी बच्चों को किया सम्मानित
पायनियर समाचार सेवा। खटीमा। इंडो-नेपाल सीमा से सटे मेलाघाट सिसैया गांव निवासी एक ही परिवार के सगे भाई-बहन ने सरकारी सेवा में चयनित होकर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। सुशील कुमार का भारत सरकार के आयकर विभाग के भोपाल जोन में असिस्टेंट इनकम टैक्स आॅफिसर के पद पर चयन हुआ है। वहीं उनकी बड़ी बहन कुमारी रेखा का उत्तराखंड राज्य कर्मचारी बीमा योजना, श्रम चिकित्सा सेवाएं विभाग में एलोपैथिक फामेर्सी अधिकारी के पद पर खटीमा में नियुक्ति हुई है। दोनों के चयन की खबर के बाद परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनके आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। खटीमा विधायक एवं उपनेता प्रतिपक्ष भुवन चंद्र कापड़ी ने टीम के साथ उनके आवास पर पहुंचकर शॉल एवं पौधा भेंट कर दोनों को शुभकामनाएं दीं। वहीं खटीमा विधानसभा से यूकेडी के संभावित प्रत्याशी रोहित भट्ट एवं जिलाध्यक्ष हरेंद्र प्रसाद उत्तराखंडी ने शॉल, डायरी और पेन भेंट कर सम्मानित किया। वहीं बीआर अंबेडकर पेबैक टू सोसाइटी के संस्थापक डॉ. उत्तम कुमार तथा प्रेस क्लब खटीमा के अध्यक्ष हरि नारायण अग्रवाल, दीपक फुलेरा, मुस्तकीम मलिक, इश्त्याक अंसारी, गोरख नाथ, सूरज गुसाईं एवं अरविंद कुमार ने प्रशस्ति पत्र, फूलमाला तथा भगवान बुद्ध और डॉ. बीआर अंबेडकर की प्रतिमा भेंट कर दोनों का सम्मान किया। दिल्ली क्लासेस खटीमा के प्रबंधक विशाल मौर्य ने टीम के साथ शॉल एवं डायरी भेंट कर उनका हौसला बढ़ाया। गायत्री अस्पताल खटीमा के डॉ. अजय चौधरी एवं डॉ. अनीता चौधरी ने भी आवास पर पहुंचकर बधाई दी।
कोरोना काल में पिता की मौत ने परिवार को झकझोरा
परिवार के लिए यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान पिता धर्मजीत की मौत हो गई थी। परिवार का एकमात्र सहारा छिन जाने के बाद आर्थिक परिस्थितियां बेहद कठिन हो गईं, लेकिन मां शांति देवी ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने अपनी आवश्यकताओं का त्याग कर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास जारी रखा। धर्मजीत ने प्रारंभ में निजी कंपनियों में मजदूरी की। इसके बाद गायत्री अस्पताल खटीमा में काम किया और बाद में छोटा सा क्लीनिक शुरू कर बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाया। पिता के निधन के बाद बड़े बेटे सिद्धार्थ कुमार, जो एम.फार्मा हैं, ने छोटा सा मेडिकल स्टोर संभालकर परिवार के भरण-पोषण और छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई में सहयोग किया।
आॅनलाइन पढ़ाई और सेल्फ स्टडी से हासिल किया मुकाम
सुशील कुमार ने बीएससी करने के बाद आॅनलाइन सेल्फ स्टडी के साथ दिल्ली क्लासेस खटीमा से कोचिंग लेकर सफलता हासिल की। वहीं रेखा ने देहरादून से एम.फार्मा करने के बाद आॅनलाइन सेल्फ स्टडी के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और एलोपैथिक फामेर्सी अधिकारी के पद पर चयनित हुईं। परिवार में चार भाई-बहन हैं। बड़े भाई सिद्धार्थ कुमार एम.फार्मा करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। दूसरे नंबर की रेखा का एलोपैथिक फामेर्सी अधिकारी के पद पर चयन हुआ है। तीसरे नंबर की बहन रेनू बीएससी-बीएड करने के बाद सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही हैं। सबसे छोटे भाई सुशील कुमार का आयकर विभाग में असिस्टेंट इनकम टैक्स आॅफिसर के पद पर चयन हुआ है। इस मौके पर मां शांति देवी ने भावुक होकर कहा कि बच्चों की इस उपलब्धि से वह बेहद खुश हैं, लेकिन अगर आज उनके पिता होते तो उनकी खुशी और भी बड़ी होती। दोनों भाई-बहनों ने अपनी सफलता से पिता के सपने को साकार कर दिखाया है। इस मौके पर पूर्व प्रधान दीपक कुमार, एडवोकेट विक्की सक्सेना, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राहुल कुमार, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि राम जन्म, बीडीसी अर्जुन कुमार, मनोज कोहली, शिव कुमार, रामप्रवेश, प्रदीप कुमार वर्मा, डॉ. नागेंद्र वर्मा, सुरेंद्र प्रसाद, अवधेश कुमार, राम अवध, हरीश चंद्र सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



