विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम एक विशेष ‘पाती’ जारी कर पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता बचाने का संदेश दिया। अपने भावनात्मक संदेश में मुख्यमंत्री ने प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण को मानव जीवन के लिए बेहद आवश्यक बताया।
सीएम योगी ने कहा कि शहरों से गौरैया, मैना और जुगनू जैसे जीवों का धीरे-धीरे गायब होना चिंताजनक संकेत है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और विकास समय की आवश्यकता हैं, लेकिन इसके साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
सनातन परंपरा में हर जीव का है विशेष महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन संस्कृति में प्रत्येक जीव-जंतु को सृष्टि का अभिन्न हिस्सा माना गया है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के नेतृत्व में रावण के विरुद्ध हुए युद्ध में वानरों के साथ-साथ एक छोटी गिलहरी ने भी अपनी भूमिका निभाई थी। यह संदेश देता है कि प्रकृति का हर जीव पर्यावरण और जीवन चक्र का महत्वपूर्ण अंग है।
वन्यजीव संरक्षण में मिली सफलता
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा किए गए संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में बाघ, तेंदुए और सारस जैसे वन्यजीवों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा प्रदेश की 13 आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) को रामसर साइट की सूची में शामिल किया जा चुका है, जो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।
युवाओं से की विशेष अपील
मुख्यमंत्री ने युवाओं से प्रकृति को करीब से समझने और उसके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवा अपने अनुभवों और पर्यावरण के प्रति जागरूकता को समाज के साथ साझा करें, ताकि प्रकृति संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा सके।
पर्यावरण संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी
अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य की सबसे बड़ी गारंटी है। उन्होंने सभी नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की।










