अमेठी। अमेठी के गौरिगंज निवासी प्रसिद्ध गीतकार, पटकथा और संवाद लेखक मनोज मुंतशिर ने एक बार फिर अपनी लेखनी का लोहा मनवाया है। फिल्म ‘मैदान’ के भावपूर्ण गीत ‘जाते हैं हम, जाने दो’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। यह उनके करियर का दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार है।
इससे पहले वर्ष 2022 में फिल्म ‘साइना’ के गीत ‘परिंदा’ के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। पुरस्कार की घोषणा के बाद अमेठी में खुशी की लहर दौड़ गई। साहित्यकारों, प्रशंसकों और क्षेत्रवासियों ने इसे जिले के लिए गर्व का क्षण बताया।
मनोज मुंतशिर का मूल निवास अमेठी के गौरिगंज नगरवा वार्ड में है। वर्ष 1999 में पत्नी नीलम के साथ वे मुंबई चले गए थे। शुरुआती संघर्ष के दिनों में उन्होंने टीवी धारावाहिकों, फिल्मों और विज्ञापनों के लिए गीत, पटकथा और संवाद लिखे। उन्हें राष्ट्रीय पहचान ‘कौन बनेगा करोड़पति’ से मिली, जहां अमिताभ बच्चन उनकी लिखी प्रभावशाली पंक्तियां बोलते थे। इसके बाद ‘तेरी गलियां’, ‘तेरी मिट्टी’ जैसे गीतों ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया, जबकि फिल्म ‘बाहुबली’ के हिंदी संवादों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
पुरस्कार की घोषणा के बाद पायनियर से बातचीत में मनोज मुंतशिर ने कहा कि यह सम्मान वह अपनी पत्नी, परिवार और उन सभी लोगों को समर्पित करते हैं, जिन्होंने हर परिस्थिति में उन पर भरोसा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि ‘आदिपुरुष’ के बाद भी जिन लोगों का विश्वास उन पर नहीं टूटा, यह पुरस्कार उनका भी है।
मनोज मुंतशिर के पिता शिव प्रताप शुक्ला और माता प्रेमा शुक्ला आज भी गौरिगंज में रहते हैं। मनोज समय-समय पर अपने गृह जनपद आते रहते हैं। उनके सम्मान से अमेठी का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित हुआ है।










