कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर रविवार को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारों लोगों के साथ योगाभ्यास किया और देशवासियों को योग को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि योग आज केवल भारत की परंपरा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को जोड़ने वाली एक सकारात्मक शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक योग की ऊर्जा महसूस की जा सकती है और यह मानवता को स्वस्थ एवं संतुलित जीवन की दिशा दिखा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम है। उन्होंने लोगों से नियमित योग अपनाने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवन पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।
केंद्र सरकार के अनुसार, इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम **‘योगा फॉर हेल्दी एजिंग’** रखी गई है। इसका उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना है कि योग बढ़ती उम्र में भी स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन जीने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह थीम शारीरिक फिटनेस, मानसिक संतुलन, भावनात्मक मजबूती और बेहतर जीवन गुणवत्ता को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में करीब 35 हजार लोगों ने भाग लिया। योग साधकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे, जिससे प्रतिभागियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस बार दुनिया भर में लगभग 2,500 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें 210 से अधिक भारतीय दूतावासों और मिशनों ने भी सक्रिय भागीदारी की। यह आंकड़ा दर्शाता है कि योग अब वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य, सामंजस्य और सामूहिक कल्याण का प्रतीक बन चुका है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। तब से हर वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश और विदेश के विभिन्न शहरों में आयोजित मुख्य कार्यक्रमों में भाग लेते रहे हैं। नई दिल्ली, चंडीगढ़, लखनऊ, मैसूर, न्यूयॉर्क, श्रीनगर और विशाखापत्तनम जैसे शहर इसके गवाह रहे हैं।
इस बार कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम को राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। योग दिवस के माध्यम से एक बार फिर भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सॉफ्ट पावर का वैश्विक प्रभाव देखने को मिला। केंद्र सरकार ने इस अवसर पर यह संदेश भी दिया कि योग केवल स्वास्थ्य सुधारने का साधन नहीं, बल्कि संतुलित, सकारात्मक और अनुशासित जीवन जीने का मार्ग है।










