बिहार:’नो-मैन्स लैंड’ से अतिक्रमण हटाने, संदिग्ध लेनदेन की सूचना आरबीआई और एफआईयू को देने का निर्देश

पटना। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बृहस्पतिवार को भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा, ‘नो-मैन्स लैंड’ एवं सीमावर्ती क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने, गायब सीमा स्तंभों (पिलर) के पुनर्स्थापन, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की चौकियों को सुदृढ़ करने तथा सीमावर्ती जिलों में संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों की जांच की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार मुख्य सचिव ने अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे शून्य से 15 किलोमीटर क्षेत्र तथा ‘नो-मैन्स लैंड’ में अतिक्रमण संबंधी रिपोर्ट का स्वतंत्र सत्यापन कराने और सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी नए अतिक्रमण को पनपने नहीं दिया जाए।

बयान में कहा गया है कि बिहार में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 735 किलोमीटर है। बयान में कहा गया कि यह सीमा पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज जिलों तथा बगहा पुलिस जिले से होकर गुजरती है। बयान में कहा गया कि सीमा की सुरक्षा के लिए बिहार पुलिस के 70 थाने और एसएसबी की 194 सीमा चौकियां (बीओपी) तैनात हैं। मुख्य सचिव को बताया गया कि राज्य में ‘नो-मैन्स लैंड’ क्षेत्र में कुल 1,359 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे, जिनमें से 1,349 को हटाया जा चुका है जबकि शेष 10 अतिक्रमणों को भी शीघ्र हटाने का निर्देश दिया गया है।

बयान में कहा गया कि समीक्षा के दौरान अररिया जिले में कई संस्थाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं तथा संदिग्ध विदेशी निवेश के मामले सामने आने की जानकारी दी गई। बयान में कहा गया कि इन मामलों की जांच के लिए आयकर विभाग (अन्वेषण), बिहार को कार्रवाई करने को कहा गया है। मुख्य सचिव ने बैंकों को निर्देश दिया कि वे संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की सूचना वित्तीय खुफिया इकाई (एफआईयू) और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेजें। उन्होंने ‘म्यूल अकाउंट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे खातों के संचालन में बैंक कर्मियों की संलिप्तता के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि इसे देखते हुए आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सीमावर्ती जिलों के सभी बैंककर्मियों का पुलिस सत्यापन कराने को कहा गया है।

‘म्यूल अकाउंट’ ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका उपयोग साइबर अपराधी धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को प्राप्त करने, स्थानांतरित करने और उसे वैध दिखाने (धन शोधन) के लिए करते हैं। बयान के अनुसार वित्त विभाग ने सीमा से सटे क्षेत्रों में स्थित सभी 1,292 बैंक शाखाओं में नकली नोट की पहचान करने वाली मशीन लगाने का निर्देश दिया है। बयान के अनुसार इनमें से अब तक 1,259 शाखाओं में मशीन स्थापित की जा चुकी हैं। बयान में कहा गया कि वित्त विभाग और निबंधन कार्यालयों द्वारा 10 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य की अचल संपत्ति के निबंधन के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य कर दिया गया है। बयान में कहा गया कि पांच लाख रुपये से अधिक के नकद लेनदेन की सूचना प्रत्येक माह आयकर विभाग को भेजी जा रही है।

बयान में कहा गया कि इसके अलावा सभी 36 जिला अवर निबंधन कार्यालय प्रतिवर्ष 30 लाख रुपये या उससे अधिक मूल्य के विक्रय दस्तावेजों के वित्तीय लेनदेन का विवरण फॉर्म-61ए के तहत आयकर विभाग को उपलब्ध करा रहे हैं।बयान में कहा गया कि बैठक में बताया गया कि साइबर ठगी और वित्तीय हेराफेरी में इस्तेमाल होने वाले संदिग्ध ‘म्यूल अकाउंट’ के खिलाफ सीमावर्ती जिलों में कार्रवाई तेज की गई है। बयान के अनुसार इसमें बताया गया कि बेतिया में 78 खातों के लेनदेन पर रोक लगा दी गई है तथा पांच प्राथमिकी दर्ज की गर्इं, बगहा में आर्थिक अपराध इकाई द्वारा चिह्नित 18 ‘म्यूल अकाउंट’ के सत्यापन के दौरान चार मामले दर्ज किए गए और 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अनुसार अन्य सीमावर्ती जिलों में भी 33 मामले दर्ज करके 148 खातों के लेनदेन पर रोक लगा दी गई है।

अधिकारियों ने बताया कि अपराधी आॅनलाइन ट्रेडिंग, निवेश पर अधिक मुनाफे तथा नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी कर रहे थे। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों और सुरक्षा एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा, ताकि राष्ट्रविरोधी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके।

Chief Sub-editor Pioneer Hindi

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