गोरखपुर। ‘पूत के पांव पालने में ही नजर आ जाते हैं।’ यह कहावत ग्राम सभा गरेय लंभुआ क्षेत्र की बेटी ज्योत्सना सिंह की प्रतिभा पूरी तरह चरितार्थ होती है। अपनी मेहनत, लगन और मेधा के बल पर ज्योत्सना ने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या में एमबीए की परीक्षा में सर्वाधिक अंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि के लिए उन्हें तीन प्रतिष्ठित स्वर्ण पदकों के लिए चयनित किया गया है। ज्योत्सना की सफलता से परिवार ही नहीं, क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। ज्योत्सना सिंह ने वर्ष 2020 में गाजियाबाद से चार वर्षीय बीटेक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने एक अमेरिकी कंपनी में करीब तीन वर्षों तक नौकरी की। कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने के दौरान भी उनका लक्ष्य उच्च शिक्षा हासिल करना रहा। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या में एमबीए में प्रवेश लिया। यहां उन्होंने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय में सर्वाधिक अंक हासिल किए।विश्वविद्यालय की ओर से घोषित परीक्षा परिणाम के आधार पर ज्योत्सना को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, स्वर्गीय राजीव रंजन राय स्मृति स्वर्ण पदक और गौरव अरोड़ा स्वर्ण पदक प्रदान किए जाएंगे। एक साथ तीन स्वर्ण पदकों के लिए चयनित होना ज्योत्सना की असाधारण शैक्षणिक उपलब्धि मानी जा रही है।
प्रशासनिक सेवा से जुड़े परिवार की बेटी ने शिक्षा में बनाया मुकाम।
ज्योत्सना का परिवार प्रशासनिक और पुलिस सेवा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान रखता है। उनके बड़े पिताजी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजय कुमार सिंह प्रदेश के कई जनपदों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। उनके पिता वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनिल कुमार सिंह मऊ और बाराबंकी समेत कई जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह डीआईजी पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वहीं ज्योत्सना के चाचा डॉ. प्रवीण रंजन आईपीएस प्रदेश के महत्वपूर्ण शहर नोएडा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।परिवार में प्रशासनिक मजबूत पृष्ठभूमि के बावजूद ज्योत्सना ने अपनी अलग पहचान बनाई है। बीटेक से लेकर कॉरपोरेट नौकरी और फिर एमबीए में विश्वविद्यालय स्तर पर सर्वोच्च अंक हासिल करने तक उनका सफर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
यह उपलब्धि पड़ाव है, मंजिल नहीं।
तीन स्वर्ण पदकों के लिए चयनित होने पर ज्योत्सना सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खुशी और गर्व का क्षण है, लेकिन वह इसे अपनी मंजिल नहीं मानतीं। उन्होंने कहा, आज की यह उपलब्धि मेरे लिए एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। सीखने, बढ़ने और समाज के लिए कुछ बेहतर करने की यात्रा अभी जारी है।ज्योत्सना की इस उपलब्धि ने उनके माता-पिता और परिवार को गौरवान्वित करने के साथ ही सुलतानपुर का मान भी बढ़ाया है। ग्रामीण परिवेश से निकलकर शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय स्तर पर सर्वोच्च मुकाम हासिल करने वाली ज्योत्सना अब क्षेत्र की बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
प्रतिस्पर्धा के दौर में बेटियों की सफलता समाज के लिए प्रेरणा : अश्वनी कुमार
गोरखपुर। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की बैठक में उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ महामंत्री अश्वनी कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में मेहनत, लगन और संघर्ष के बल पर सफलता हासिल करने वाली बेटियां पूरे समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय हैं। उन्होंने ज्योत्सना की उपलब्धि को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष, अनुशासन और परिश्रम युवाओं को आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देता है। बैठक में संगठन मंत्री प्रवीण सिंह, अधिवक्ता धीरेंद्र प्रताप सिंह, सत्य शंकर सिंह, शत्रुंजय सिंह रैकवार, वैभव शाही, विजय सिंह, विशाल चंद, देवेंद्र सिंह व पप्पू सिंह मौजूद रहे।