गांधी नगर में रात तीन बजे लगी आग, नकदी, अनाज, कपड़े और घरेलू सामान जलकर राख; लेखपाल ने किया नुकसान का आकलन

*बी पी त्रिपाठी ,बलरामपुर*
उतरौला (बलरामपुर) कभी जिस घर में परिवार की खुशियां और रोजमर्रा की जिंदगी की रौनक बसी थी, वहां अब जले हुए सामान और राख के सिवा कुछ नहीं बचा है। मोमबत्ती से निकली एक छोटी-सी चिंगारी ने देखते ही देखते एक परिवार की वर्षों की मेहनत और जमा-पूंजी को आग के हवाले कर दिया। इस दर्दनाक हादसे में घर में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर नष्ट हो गया। गनीमत रही कि आग की चपेट में आने से कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन परिवार के सामने अब जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का संकट खड़ा हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उतरौला कोतवाली क्षेत्र के गांधी नगर मोहल्ला निवासी राकेश पुत्र लल्लन रात में मोमबत्ती जलाकर सो गए थे। इसी दौरान रात करीब तीन बजे मोमबत्ती से निकली चिंगारी के कारण घर में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। गहरी नींद में सो रहे परिजनों को जब तक आग लगने का एहसास हुआ, तब तक लपटें घर के भीतर फैल चुकी थीं।
अचानक घर में आग देखकर परिजनों में चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोगों ने किसी तरह अपनी जान बचाई और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन आग की भयावहता के आगे उनकी कोशिशें नाकाम साबित हुईं। कुछ ही देर में घर में रखा सारा सामान आग की भेंट चढ़ गया। नकदी, अनाज, कपड़े, चारपाई, पंखा, कूलर, बर्तन सहित दैनिक उपयोग की तमाम वस्तुएं जलकर राख हो गईं। आग ने परिवार की वर्षों की मेहनत से जुटाई गई गृहस्थी को पलभर में तबाह कर दिया।
हादसे के बाद घर का दृश्य बेहद हृदयविदारक था। जहां कभी परिवार के सदस्यों के रहने और खाने-पीने की व्यवस्था थी, वहां अब जले हुए सामान का ढेर और बिखरी हुई राख दिखाई दे रही थी। घर में मौजूद जरूरी सामान नष्ट हो जाने से पीड़ित परिवार के सामने रहने, खाने और पहनने तक की समस्या उत्पन्न हो गई है। एक ही रात में परिवार की पूरी गृहस्थी उजड़ जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलने पर हल्का लेखपाल अखिलेश वर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर आग से हुई क्षति की जांच की और जले हुए सामान का आकलन किया। प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन किए जाने के बाद पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता मिलने की उम्मीद है।
इस हादसे ने एक बार फिर घरों में मोमबत्ती जलाकर सोने के दौरान बरती जाने वाली सावधानी की जरूरत को रेखांकित किया है। हालांकि इस घटना में परिवार के सभी सदस्यों की जान बच गई, लेकिन उनकी वर्षों की मेहनत से खड़ी की गई गृहस्थी पलभर में समाप्त हो गई। अब पीड़ित परिवार को इस मुश्किल घड़ी से उबरने के लिए प्रशासनिक सहायता और समाज के सहयोग की दरकार है।



