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जलभराव भी नहीं रोक पाया कांवड़िए का हौसला

फरीदाबाद। पायनियर समाचार सेवा। बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी जहां आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, वहीं इसी जलभराव के बीच एक कांवड़िए की आस्था और हौसले की तस्वीर सामने आई है। फरीदाबाद के सरूरपुर निवासी…

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जलभराव भी नहीं रोक पाया कांवड़िए का हौसला
सड़क पर भरे पानी में लेटकर एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए रमन।

फरीदाबाद। पायनियर समाचार सेवा। बारिश के बाद सड़कों पर जमा पानी जहां आम लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है, वहीं इसी जलभराव के बीच एक कांवड़िए की आस्था और हौसले की तस्वीर सामने आई है। फरीदाबाद के सरूरपुर निवासी 28 वर्षीय रमन ने पृथला की जलमग्न सर्विस रोड पर भी अपनी दंडवत कांवड़ यात्रा नहीं रोकी। सड़क पर भरे पानी में लेटकर एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए रमन ने यात्रा जारी रखी। उनकी इस अनोखी यात्रा का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रमन प्रेमानंद महाराज के स्वास्थ्य की कामना को लेकर करीब 350 किलोमीटर की दंडवत कांवड़ यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने 22 जून को यात्रा शुरू की थी और अब तक पलवल तक पहुंच चुके हैं। उनका लक्ष्य वृंदावन पहुंचकर गंगाजल से प्रेमानंद महाराज का स्नान कराना है।

पानी में भी की यात्रा :

पृथला की सर्विस रोड पर बारिश के बाद काफी पानी भर गया था। सामान्य आवाजाही तक प्रभावित थी, लेकिन रमन ने जलभराव को अपनी यात्रा में बाधा नहीं बनने दिया। वह पानी में लेटकर दंडवत करते हुए आगे बढ़ते रहे। रमन का कहना है कि उन्होंने यात्रा पूरी करने का संकल्प लिया है और कोई भी परेशानी उन्हें इससे पीछे नहीं हटा सकती।

रोजाना आठ किलोमीटर की यात्रा:

रमन के साथ छह लोगों की टीम चल रही है। इनमें उनके भाई सोनू और कुंदन के अलावा तीन दोस्त शामिल हैं। यात्रा की शुरुआत में वह प्रतिदिन करीब पांच किलोमीटर चलते थे, लेकिन अब रोजाना लगभग आठ किलोमीटर की दूरी तय कर रहे हैं। टीम अपने साथ खाना बनाने का सामान भी लेकर चल रही है।

प्रेमानंद महाराज के प्रवचन से मिली प्रेरणा:

रमन ने करीब तीन साल पहले ऑनलाइन प्रेमानंद महाराज के प्रवचन सुनना शुरू किया था। वह रोजाना तीन से चार घंटे उनके प्रवचन सुनते थे। उनके स्वास्थ्य की जानकारी मिलने के बाद रमन ने दंडवत कांवड़ यात्रा का संकल्प लिया। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने विदेश की नौकरी तक छोड़ दी।

पांच साल जॉर्डन में की नौकरी:

रमन 10वीं तक पढ़े हैं। पहले फरीदाबाद की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम किया और करीब पांच साल पहले जॉर्डन चले गए। वहां एक्सपोर्ट कंपनी में को-ऑर्डिनेटर के रूप में नौकरी करते थे और करीब 45 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। 21 अप्रैल को जॉर्डन से भारत लौटने के बाद उन्होंने यात्रा शुरू की। रमन के परिवार में माता-पिता, चार भाई और एक बहन हैं। उनके पिता बदरपुर बॉर्डर पर सुरक्षा गार्ड हैं। बारिश, जलभराव और मुश्किल रास्तों के बावजूद दंडवत यात्रा जारी रखने वाले रमन की तस्वीर यह दिखाती है कि आस्था के आगे मुश्किल रास्ते भी कांवड़िए के हौसले को नहीं रोक पाते।