एसआईआर पर कांग्रेस के आरोपों को भाजपा ने नकारा

- प्रताप बिष्ट बोले—पात्र मतदाताओं का अधिकार सुरक्षित रखना प्राथमिकता
- 71.58 लाख मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में दर्ज होने का किया दावा, बोले—पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को पारदर्शी बनाना
हल्द्वानी। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नैनीताल जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची का सत्यापन पात्र नागरिकों का मताधिकार छीनने के लिए नहीं, बल्कि सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से किया जाता है। बिष्ट ने कहा कि पुनरीक्षण के दौरान मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित और दोहरे पंजीकरण वाले मतदाताओं की पहचान करने के साथ पात्र नागरिकों के नाम जोड़ना भी जरूरी है। किसी नाम को लेकर आपत्ति होने पर संबंधित व्यक्ति को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलता है। उन्होंने कांग्रेस से आरोप लगाने के बजाय गड़बड़ियों के ठोस प्रमाण निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा।
भाजपा जिलाध्यक्ष के अनुसार, उत्तराखंड में एसआईआर से पहले मतदाता सूची में करीब 79.60 लाख मतदाता दर्ज थे। 14 जुलाई 2026 को प्रकाशित प्रारूप सूची में 71,33,785 मतदाता शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि दावे-आपत्तियों के बाद अंतिम सूची में 1,29,872 नए नाम जोड़े गए और 1,04,708 नाम हटाए गए। इसके बाद कुल मतदाताओं की संख्या 71,58,949 हो गई। बिष्ट ने कहा कि भाजपा किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची और प्रत्येक पात्र नागरिक के मताधिकार की सुरक्षा को आवश्यक बताया।



