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23 करोड़ का कथित बैंक घोटाला… सच किसके दरवाजे जाकर रुकेगा

23 करोड़ का कथित बैंक घोटाला… सच किसके दरवाजे जाकर रुकेगा

पीलीभीत। जिले में दो राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़े करीब 23 करोड़ रुपये के कथित वित्तीय फर्जीवाड़े की जांच अब निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ती दिख रही है। एक ओर पंजाब एंड सिंध बैंक की टनकपुर बाईपास रोड शाखा में 4.15 करोड़ रुपये के कथित गबन का मामला है, तो दूसरी ओर इंडियन बैंक की गांधी स्टेडियम रोड शाखा में करीब 19 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट कथित रूप से फर्जी तरीके से स्वीकृत करने का आरोप है। दोनों मामलों में न्यायालय के आदेश पर सुनगढ़ी थाना पुलिस मुकदमा दर्ज कर विवेचना कर रही है।

बुधवार को विवेचक इंडियन बैंक शाखा पहुंचे, जहां उन्होंने वर्तमान शाखा प्रबंधक से पूरे प्रकरण की जानकारी ली। जांच के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक की भूमिका, बैंक अभिलेखों, चेकों के इस्तेमाल, लेनदेन और अन्य दस्तावेजों के संबंध में भी जानकारी जुटाई गई। सूत्रों के अनुसार विवेचना अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि हर कड़ी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

मामले के शिकायतकर्ता शहर के केजीएन सेकंड कॉलोनी निवासी मोहम्मद जीशान की अमरिया क्षेत्र स्थित उजैफा एग्रोटेक राइस मिल के प्रोपराइटर हैं। उनका आरोप है कि पंजाब एंड सिंध बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक राधेश्याम प्रभाकर और अन्य कर्मचारियों ने अधिक ऋण सीमा और कम ब्याज दर का लालच देकर बैंकिंग दस्तावेज हासिल किए तथा व्हाट्सएप पर चेकों की तस्वीरें मंगवाकर मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच करीब 4.15 करोड़ रुपये निकाल लिए।

इसी शिकायतकर्ता ने इंडियन बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित वर्मा समेत अन्य अधिकारियों पर भी बिना जानकारी 19 करोड़ रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत करने, फर्जी हस्ताक्षर करने, पत्नी को कथित रूप से बिना सहमति गारंटर बनाने और करोड़ों रुपये के आरटीजीएस व अन्य बैंकिंग लेनदेन में अनियमितता बरतने का आरोप लगाया है।इधर पुलिस भी बैंक रिकॉर्ड, कंप्यूटर डेटा, चेक, आरटीजीएस, दस्तावेज और संबंधित व्यक्तियों के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। विवेचना पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच की रफ्तार बढ़ी तो सवालों का दायरा भी बढ़ा

अब तक उंगलियां सिर्फ बैंक अधिकारियों की ओर उठ रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सवाल शिकायतकर्ता की भूमिका को लेकर भी उठने लगे हैं। आखिर करोड़ों रुपये के लेनदेन, सीसी लिमिट, आरटीजीएस और बैंकिंग गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहीं तो खाताधारक को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई,यदि नहीं हुई, तो कैसे नहीं हुई, और यदि हुई, तो शिकायत इतनी देर से क्यों सामने आई, इन सवालों के जवाब भी अब पुलिस की विवेचना तलाश रही है।
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब हर पहलू की पड़ताल की जा रही है और किसी भी पक्ष को बिना जांच के क्लीन चिट नहीं दी जाएगी। जिले में चर्चा है कि जैसे-जैसे विवेचना आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उन लोगों की बेचैनी भी बढ़ रही है जिनके नाम इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े हैं। आखिर यह बैंकिंग व्यवस्था की चूक थी, सुनियोजित साजिश थी या फिर कहानी में कोई और परत छिपी है—इसका जवाब अब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

करोड़ों का खेल… और किसी को भनक नहीं

करीब 23 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन के इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े वित्तीय लेनदेन आखिर बिना खाताधारक की जानकारी के कैसे होते रहे, क्या बैंकिंग व्यवस्था इतनी लापरवाह थी, या फिर कहानी में अभी कई पन्ने खुलना बाकी हैं, फिलहाल पुलिस हर दस्तावेज, हर हस्ताक्षर और हर डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाल रही है। इस बार जांच की सुई केवल बैंक तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम के हर किरदार की ओर घूमती नजर आ रही है। अब देखना यह है कि करोड़ों के इस खेल का असली मास्टरमाइंड कौन निकलता है और आखिर भरोसे की इस डकैती का सच किसके दरवाजे पर जाकर रुकता है।
रिपोर्ट-अदनान खान

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