2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने का संकल्प

ऋषिकेश।(रजनी गोयल)
राष्ट्रीय महिला आयोग एवं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में एम्स ऋषिकेश के मुख्य सभागार में ‘शक्ति समागम: सृजन से समृद्धि’ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में करीब 22 हजार समूहों से जुड़ी 2.5 लाख से अधिक महिलाओं ने 300 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण का उपयोग किया है।
विजया रहाटकर ने वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प दिलाते हुए बालिकाओं की शिक्षा और सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को महिला अधिकारों, साइबर सुरक्षा, घरेलू हिंसा कानून और पोषण संबंधी जानकारी से जोड़ने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने की। उन्होंने उत्तराखंड की महिलाओं के योगदान और उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
विशिष्ट अतिथि विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और लखपति दीदी योजना के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख किया। महापौर शंभू पासवान और एम्स निदेशक डॉ. मीनू सिंह ने भी महिला स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता पर विचार रखे। कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, लखपति दीदियां और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने बालिका शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक विकास में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।



