देहरादून। चकराता विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लिए संचालित योजनाओं में लाभार्थी चयन को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कैबिनेट मंत्री खजान दास के सरकारी आवास के बाहर प्रदर्शन कर योजनाओं के क्रियान्वयन और लाभार्थियों के चयन पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि योजनाओं में कथित तौर पर 15 से 20 प्रतिशत कमीशनखोरी के चलते कांग्रेस से जुड़े लोगों को करीब 80 प्रतिशत काम दिए जा रहे हैं, जबकि पात्र लोगों को योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने मौजूदा सूची को स्थगित करने की मांग करते हुए धरना दिया और मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
वहीं, लगाए गए आरोपों पर कैबिनेट मंत्री खजान दास ने कड़ा पलटवार किया। मंत्री ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाया गया एक भी आरोप साबित हो जाता है तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। मंत्री ने इसी दौरान आत्महत्या तक करने की बात कही।मंत्री के इस बयान के बाद मामला और गरमा गया है। एक ओर प्रदर्शनकारी योजनाओं के लाभार्थी चयन और कथित कमीशनखोरी की जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं मंत्री ने आरोपों को गलत बताते हुए उन्हें साबित करने की चुनौती दी है।
फिलहाल विवाद का केंद्र अनुसूचित जाति-जनजाति योजनाओं के लाभार्थी चयन और कार्य आवंटन की प्रक्रिया बनी हुई है। आरोपों की वास्तविकता और चयन प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं, यह संबंधित अभिलेखों और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रिपोर्ट – सोनू उनियाल