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चिन्यालीसौड़ में डामर उखड़ा तो खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

पायनियर समाचार सेवा। उत्तरकाशी। चिन्यालीसौड़ विकासखंड के अंतर्गत धरासु-जोगत मोटर मार्ग पर धरासु पुल से देवीसौड़ तक कराया गया डामरीकरण दो महीने भी नहीं टिक पाया। जगह-जगह डामर उखड़ने से सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 6…

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चिन्यालीसौड़ में डामर उखड़ा तो खुली निर्माण गुणवत्ता की पोल

पायनियर समाचार सेवा। उत्तरकाशी। चिन्यालीसौड़ विकासखंड के अंतर्गत धरासु-जोगत मोटर मार्ग पर धरासु पुल से देवीसौड़ तक कराया गया डामरीकरण दो महीने भी नहीं टिक पाया। जगह-जगह डामर उखड़ने से सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 6 करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से कराए गए इस कार्य के तहत 7.432 किलोमीटर सड़क पर डामरीकरण किया गया है। इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद डामर के जल्द उखड़ने से निर्माण गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। वहीं नेरी और तुल्याड़ा गांव के समीप पिराड़ा समेत संवेदनशील डेंजर जोन में सुरक्षा इंतजामों की कमी भी चिंता का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर डामरीकरण तो करा दिया गया, लेकिन इसकी गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। ग्रामीणों ने सड़क के डामरीकरण की तकनीकी जांच और मौके पर गुणवत्ता परीक्षण कराने की मांग की है।
धरासु-जोगत मोटर मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। ऐसे में डामरीकरण के महज दो महीने के भीतर जगह-जगह सड़क की ऊपरी परत उखड़ना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है तो डामर इतनी जल्दी क्यों उखड़ रहा है।वहीं यदि गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और सड़क की मरम्मत सुनिश्चित की जानी चाहिए।तुल्याड़ा के समीप पिराड़ा डेंजर जोन लंबे समय से खतरे का सबब बना हुआ है। पहाड़ी से आए दिन पत्थर गिरने की घटनाओं के बीच स्कूली बच्चों, पैदल राहगीरों और वाहन चालकों की आवाजाही जोखिम भरी बनी हुई है। दशकों पुराने इस मोटर मार्ग के कई संवेदनशील स्थानों का अब तक स्थायी उपचार नहीं हो पाया है।नेरी एवं तुल्याड़ा के पूर्व प्रधान रमेश चंद्र, भाग्यन दास, उपप्रधान शुभम रावत, अनिल पंवार और वीरेंद्र कुमार समेत ग्रामीणों ने डामरीकरण की गुणवत्ता और डेंजर जोन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़क की वास्तविक गुणवत्ता और डेंजर जोन की सुरक्षा व्यवस्था में सुधार मौके पर दिखाई देना चाहिए।नेरी गांव निवासी एवं चिन्यालीसौड़ ब्लॉक की कनिष्ठ उप प्रमुख भानुप्रिया थपलियाल ने कहा कि सड़क की सुरक्षा केवल डामर बिछाना ही प्रयाप्त नहीं है। जहां पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने का खतरा हो, वहां सुरक्षा दीवार, बैरिकेडिंग और अन्य जरूरी सुरक्षा उपाय भी होने चाहिए। उन्होंने विभाग से डेंजर जोन का वैज्ञानिक एवं स्थायी उपचार कराने की मांग की।मामले में पीएमजीएसवाई के अधीक्षण अभियंता एसके बसलियाल ने कहा कि सड़क की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले का संज्ञान लिया गया है और सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि ठेकेदार की जिम्मेदारी के तहत पांच साल तक सड़क की मरम्मत कराई जाएगी। अब सवाल यह है कि 6 करोड़ 19 लाख रुपये की लागत से 7.432 किलोमीटर सड़क पर कराया गया डामरीकरण दो महीने में ही क्यों उखड़ने लगा। साथ ही वर्षों से खतरे में आवाजाही कर रहे नेरी और तुल्याड़ा के ग्रामीणों को पिराड़ा डेंजर जोन से सुरक्षित रास्ता आखिर कब मिलेगा।

सड़क की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले का संज्ञान लिया गया है और सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि ठेकेदार की जिम्मेदारी के तहत पांच साल तक सड़क की मरम्मत कराई जाएगी।
-एसके बसलियाल, अधीक्षण अभियंता, पीएमजीएसवाई