पुलिस ने अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन, फॉरेंसिक तकनीकों का लिया प्रशिक्षण
पायनियर समाचार सेवा
लखनऊ। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि वैज्ञानिक एवं साक्ष्य आधारित विवेचना उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में गुणात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस महानिदेशक ने शुक्रवार को यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस द्वारा आयोजित प्रशिक्षण बैच को संबोधित कर रहे थे। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रशिक्षण एवं प्रशिक्षण अवसंरचना में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसका सकारात्मक प्रभाव फील्ड पुलिसिंग में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री योगी की दूरदृष्टि एवं मार्गदर्शन में उप्र स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।

राष्ट्रीय स्तर की क्षमताओं से युक्त इस संस्थान की स्थापना से उत्तर प्रदेश पुलिस की फॉरेंसिक क्षमता में अभिवृद्धि के साथ-साथ हमारे विवेचकों एवं पुलिसकर्मियों की वैज्ञानिक विवेचना संबंधी क्षमता निर्माण को भी एक सुदृढ़ आधार प्राप्त हुआ है। यूपीएसआईएफएस द्वारा फॉरेंसिक, लॉ एवं साइबर के समन्वय से उच्च स्तरीय प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना एक विशिष्ट एवं सराहनीय पहल है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों एवं पूर्व प्रशिक्षण बैचों के प्रयासों से प्रदेश में प्रतिमाह लगभग 5,000 क्राइम सीन्स को वैज्ञानिक तरीके से प्रोटेक्ट कर साक्ष्यों का संकलन, लेबलिंग, पैकेजिंग एवं एफएसएल तक प्रेषण किया जा रहा है। उन्होंने इसे वैज्ञानिक विवेचना की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ठोस कदम बताया।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि फिजिकल एवं साइंटिफिक एविडेंस अपराधी और अपराध के बीच संबंध स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे गवाहों पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ गलत विवेचना की संभावना घटती है और नागरिकों का पुलिस एवं न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होता है। उन्होंने संस्थान के ध्येय वाक्य ट्रुथ एविडेंस, जस्टिस को साकार करने में साक्ष्य की केंद्रीय भूमिका पर बल दिया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नई न्याय संहिताओं में वैज्ञानिक विवेचना एवं साक्ष्य संकलन को विशेष महत्व दिया गया है।
इसलिए प्रशिक्षण प्राप्त पुलिसकर्मियों की भूमिका इनके प्रभावी क्रियान्वयन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। पुलिस महानिदेशक ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि नॉलेज, स्किल और एटीटयूड तीनों आवश्यक हैं, लेकिन एटीटयूड सबसे महत्वपूर्ण है। प्रत्येक क्राइम सीन पर केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय ऐसे वैज्ञानिक एवं भौतिक साक्ष्य एकत्र किए जाने चाहिए, जो अपराधी तक पहुँचने तथा न्यायालय में अपराध सिद्ध करने में प्रभावी हों। सीन ऑफ क्राइम की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी, साक्ष्यों की सुरक्षित बरामदगी, लेबलिंग, पैकेजिंग तथा चेन ऑफ कस्टडी का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि फील्ड यूनिट को आने वाले समय में उत्तर प्रदेश पुलिस की सम्मानित एवं अपरिहार्य इकाइयों के रूप में स्थापित करने का अवसर प्रशिक्षणार्थियों के पास है। इसके लिए निरंतर सीखने की प्रवृत्ति, समर्पण, प्रोफेशनलिज्म और परिणाम देने की भावना आवश्यक है। यह प्रशिक्षण बैच तीन अगस्त से शुरू हुआ था। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान आरक्षी से निरीक्षक स्तर के लगभग 600 से अधिक प्रतिभागियों को अपराध स्थल के वैज्ञानिक प्रबंधन, साक्ष्यों के संरक्षण एवं संकलन, घटनास्थल के निरीक्षण, फॉरेंसिक तकनीकों तथा विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञो ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने अपने सम्बोधन में कहा कि इस कोर्स को कौशल विकास के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें केस स्टडी एवं कृत्रिम न्यायालय के अभिनव प्रयोग से प्रशिक्षण प्रदान किया गया।